Breaking इलाहाबाद के बाद आगरा का नाम भी बदले जाने का प्रस्ताव, जुटाए जा रहे प्रमाण, देखें वीडियो

-शासन ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से मांगा साक्ष्य

-पूर्व विधायक स्व. जगन प्रसाद गर्ग ने की थी नाम बदलने की मांग

आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार ने सबसे पहले मुगलसराय का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर रखा। फिर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया। इसके बाद फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या कर दिया। अब लगता है आगरा की बारी है। आगरा नाम बदला जाना प्रस्तावित है। आगरा का नाम बदले जाने के संबंध में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से साक्ष्य मांगे गए हैं। इस पर विचार मंथन किया जा रहा है।

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जगन प्रसाद गर्ग ने की थी मांग

पूर्व विधायक स्वर्गीय जगन प्रसाद गर्ग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की थी कि आगरा का नाम बदलकर अग्रवन किया जाए। उनका तर्क था कि आगरा अग्रवालों के कारण प्रसिद्ध है। आगरा का प्राचीन नाम अग्रवन था। उनका तर्क था कि आगरा पहले नाम अग्रवन था। अग्रवन को पहले अकबराबाद किया। उसके बाद इसे आगरा कर दिया गया। आगरा का कोई मतलब नहीं होता। इस क्षेत्र में बहुत वन थे और यहां अग्रवाल जाति के लोग रहते थे, इसलिए इसे अग्रवन या अग्रवाल कहते थे। जो बाद में आगरा हो गया। ऐसे में फिर से शहर का पुराना नाम अग्रवन या अग्रवाल किया जाए। यह बात नवम्बर, 2018 की है। शासन न इस पत्र को अब फाइल से निकाला है।

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महाभारत में अग्रवन था

जानकारों का कहना है कि महाभारत के समय यानी 5000 साल पूर्व आगरा को अग्रवन या अग्रबाण कहा जाता था। आगरा का संबंध ऋषि अंगिरा से भी है जो 1000 ईसापूर्व हुए थे। कहा जाता है कि अंगिरा से आगरा हो गया। तौलमी पहला व्यक्ति था, जिसने इसे आगरा कहकर संबोधित किया। तभी से आगरा प्रचलित हो गया। अकबर ने आगरा का नाम अकबराबाद कर दिया, लेकिन आगरा का अस्तित्व बना रहा। ज्ञात इतिहास कहता है कि आगरा शहर को सिकंदरा लोदी ने 1506 में बसाया था। 1526 से 1658 तक मुगलों ने आगरा को राजधानी बनाकर शासन किया। इस कारण आगरा की ख्याति पूरी दुनिया में हैं। मुगलों ने यहां आगरा किला, फतेहपुर सीकरी और ताजमहल का समेत तमाम स्मारकों का निर्माण किया।

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क्या कहते हैं प्रो. सुगम आनंद

शासन ने आगरा विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर प्रमाण मांगे हैं कि आगरा को नाम अग्रवन क्यों किया जाए। इस बारे में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुगम आनंद ने इस विषय के जानकारों के साथ अपने कार्यालय में बैठक की। आगरा का प्राचीन नाम अग्रवन था या नहीं, इस पर मंथन हुआ। उन्होंने बताया कि आगरा गजेटियर में अग्रवन का उल्लेख मिलता है, लेकिन इस बारे में कोई साक्ष्य नहीं है। बृज के 12 वन में भी अग्रवन का उल्लेख नहीं है। हो सकता है कि 24 वन में हो। हो सकता है अग्रवाल समाज के पास इस बात के प्रमाण हों। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्ष्यों के आधार चलत है, आस्था या विश्वास पर नहीं। अगर प्रमाण उपलब्ध हैं तो कोई संदेह नहीं है। किंवदन्ती को प्रमाण नहीं माना जाता है।

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अगली बैठक में तथ्यात्मक रिपोर्ट

बैठक में इतिहास संकलन समिति के डॉ. तरुण शर्मा, डॉ. अमी आधार विजय, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, डॉ. भानु प्रताप सिंह आदि उपस्थित थे। अग्रवाल समाज की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया। इसलिए बैठक 22 नवम्बर, 2019 तक के लिए टाल दी गई है। तय किय गया कि अगली बैठक में आगरा और अग्रवन के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

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Bhanu Pratap
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