भारत का किसान इस कारण खेत की मेड़ पर नहीं लगाता पेड़, World environment day पर खुला राज

भारत का किसान इस कारण खेत की मेड़ पर नहीं लगाता पेड़, World environment day पर खुला राज
World environment day 2019

Dhirendra yadav | Publish: Jun, 04 2019 06:26:15 PM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

ताजमहल को बचाने के लिए बनाए गए टीटीजेड में पौधारोपण की स्थिति बहुत खराब

आगरा। पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है 10400 वर्ग किलोमीटर में फैला ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड)। इसके छह जनपद आगरा, एटा, फिरोजाबाद, हाथरस, मथुरा व भरतपुर में ‘फौरेस्ट कवर’ इनके भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 3.47 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का यह फॉरेस्ट कवर 6.09 प्रतिशत व ट्री कवर 3.09 प्रतिशत कुल 9.18 प्रतिशत है। भारत में यह फॉरेस्ट कवर 21.54 प्रतिशत व ट्री कवर 2.85 प्रतिशत, कुल 24.39 प्रतिशत है। हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य 33 प्रतिशत है। यह इस प्रकार पूरे देश व उत्तर प्रदेश की तुलना में टी0टी0जेड में वृक्षों व वनों की स्थिति अति खराब है।

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नहीं मिलती पेड़ काटने की अनुमति
आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन के सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0जैन ने बताया कि जब तक निजी भूमि पर वृक्षारोपण नहीं होगा, तब तक हम टी0टी0जेड में ग्रीन कवर में वृद्धि नहीं कर सकते हैं। किसान एवं निजी भूधारक अपनी निजी व गैर वन भूमि पर वृक्षारोपण उसी स्थिति में करेगा जब वृक्षों को काटने की स्पष्ट नीति होगी।

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World environment day 2019

तत्काल जारी हो अधिसूचना
केसी जन ने एनजीटी ने प्रदेश सरकार के उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा-21 के अन्तर्गत निजी भूमि पर वृक्षों को काटने की छूट प्रदान करने वाली जो अधिसूचना 31-10-2017 को जारी की गयी थी, को निरस्त कर दिया गया है और नयी अधिसूचना जारी करने की स्वतंत्रता दी है। एन0जी0टी0 के उक्त आदेश 11.9.2018 के क्रम में वृक्ष संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत नवीन अधिसूचना अविलम्ब जारी होनी चाहिए। निजी भूमि पर वृक्षारोपण से ही टी0टी0जेड में ग्रीन कवर बढ़ेगा जो वायु प्रदूषण को रोकेगा और पर्यावरण में अपेक्षित सुधार आ सकेगा। भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय एग्रोफॉरेस्ट्री पॉलिसी-2014 के अंतर्गत भी यही मंतव्य व विचारधारा अंर्तनिहित है। इससे निजी व गैर वन भूमि पर पौधारोपण होगा।

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World environment day 2019

ये पौधे रोपे जाएं
एक जून -2019 को सर्किट हाउस में मुख्य सचिव अनुप चन्द्र पाण्डेय के साथ विजन प्लॉन को लेकर हुई बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। इस पर वे सहमत थे। निजी भूमि पर पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिये वृक्षों को काटने की स्पष्ट परिभाषित नीति होनी चाहिये। सचिव जैन ने यह भी कहा कि हमें स्थानीय प्रजाति के वृक्षों को ही लगाना चाहिये जो कड़ी गर्मी व सर्दी में कम पानी के साथ भी जीवित रहते हैं और जैव विविधता को भी प्रोत्साहित करते हैं। देसी कदम, तमाल, रैमजा, छौंकर, धौं, पीलू, दतरंगा, अंकोल, रोहेणा, पलास, कैंत, कुण्ठा आदि प्रमुख हैं। किसान अपने खेतों की मेंडों पर भी पेड़ लगाने से बचते हैं क्योंकि उन्हें काटने की अनुमति नहीं मिल पाती है। इस गम्भीर समस्या के बारे में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नईक व मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गये पत्र में अवगत कराया गया है।

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टीटीजैड के जनपदों में फौरेस्ट कवर (वर्ग किलोमीटर में) फौरेस्ट सर्वे ऑफ इण्डिया देहरादून की रिपोर्ट वर्ष 2017 के अनुसार
नाम जनपद भौगोलिक क्षेत्र वर्ष 2017 (वर्ग किमी0 में) क्ुल योग भौगोलिक क्षेत्र परिवर्तन झाड़ियाँ (वर्ग किमी0 में) अति मध्यम खुला (वर्ग किमी0 में) का प्रतिशत
घना घना जंगल
जंगल जंगल
आगरा 4041 0 63 209 272 6.73 4 64
एटा 2431 0 1 30 31
1.28 – 3 0
फिरोजाबाद 2407 0 5 44 49 2.04 0 24
हाथरस 3340 0 4 56 60 1.8 5 3
मथुरा 1840 0 1 22 23 1.25 –1 0
भरतपुर 5066 0 22 207 229 4.52 13 79

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