हर एक लाख में से ११ करते हैं आत्महत्या

राज्य में हर एक लाख में से करीब ११ लोग आत्महत्या कर लेते हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो देश के गिने-चुने राज्यों में गुजरात शामिल है। आत्महत्या का सबसे

By: मुकेश शर्मा

Published: 11 Sep 2017, 08:31 PM IST

अहमदाबाद।राज्य में हर एक लाख में से करीब ११ लोग आत्महत्या कर लेते हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो देश के गिने-चुने राज्यों में गुजरात शामिल है। आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण तनाव है, विशेषज्ञों का कहना है कि हर साठवां व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है और प्रयास करने वाले १५० में से एक को आत्महत्या करने में सफलता मिल जाती है।


गुजरात विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग एवं मेंटल अस्पताल के संयुक्त तत्वाधान में सुसाइड प्रिवेंशन डे के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित फोटो प्रदर्शनी के दौरान मेंटल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौहाण ने यह जानकारी दी।

फोटो प्रदर्शन के उद्घाटन मौके पर कुलपति डॉ. हिमांशु पंड्या भी मौजूद रहे। डॉ. चौहाण के अनुसार केरल, कर्नाटक, आध्रप्रदेश, तमिलनाडू और महाराष्ट्र के बाद गुजरात में भी आत्महत्या की घटनाएं खूब सामने आती हैं।

आंकड़े बताते हैं कि राज्य में वर्ष २०१५ में ७२४५ लोगों ने आत्महत्या की थी। यहां के हर एक लाख में से १०.९०( करीब ग्यारह) व्यक्ति आत्महत्या करते हैं। उनका कहना है कि बदलते परिवेश में विद्यार्थियों में तनाव ज्यादा बढ़ा है। देश में वर्ष २०१०-११ के दौरान हर एक लाख विद्यार्थियों में से आत्महत्या करने वालों का आंकड़ा पांच था जो वर्ष २०१३-१४ में बढक़र छह पर पहुंच गया है।

‘जिन्दगी का मतलब ही संघर्ष’

गुजरात विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. कामयानी माथुर के अनुसार जिन्दगी जीने के लिए है और जिन्दगी का मतलब ही संघर्ष है। उनके अनुसार आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण हताशा है। यदि आत्महत्या करने से पहले व्यक्ति गहराई से सोचे या फिर किसी को अपनी समस्या साझा करे तो उसके डगमगाए पैरों को रोका जा सकता है। आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में गुजरात विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में पोस्टर प्रदर्शनी में २५० विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में भाग लिया।

ब्ल्यू व्हेल का पोस्टर भी चर्चित

प्रदर्शनी के दौरान आत्महत्या को रोकने और उपाय के अनेक पोस्टर लगे हुए थे। इनमें ब्ल्यू व्हेल का पोस्टर भी ज्यादा चर्चित रहा। विद्याॢथयों ने ब्ल्यू व्हेल गेम के सभी पहलुओं को लेकर पोस्टर बनाया है। मनोचिकित्सक डॉ. अजय चौहाण ने बताया कि दरअसल यह कोई खेल नहीं है। इस गेम का ऐसे बच्चे ज्यादा शिकार होते हैं जो भावनाओं पर काबू नहीं कर पाते हैं और सामने वाला एडमिन को भावनाओं के साथ खेलने का मौका मिल जाता है। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के प्रति थोड़ा भी सतर्क रहें तो इस तरह के गेम के आकर्षण में फंसकर कोई भी बच्चा या किशोर अपनी जांन नहीं गंवाएगा। यह ब्रेन वॉश जैसा है।

एकल परिवार के प्रति झुकाव भी कारण

मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रोफेसर अश्विन जंसारी ने बताया कि एकल परिवारों की ओर झुकाव भी आत्महत्या की बढ़ती हुए घटनाओं का कारण हो सकता है। संयुक्त परिवार में रहने वालों की तुलना में एकल परिवार में रहने वालों में तनाव ज्यादा होता है। संयुक्त परिवार में एक नहीं तो दूसरा और दूसरा नहीं तो तीसरा सदस्य ढांढस बंधाता नजर आ जाता है। इसलिए संयुक्त परिवारों में रहने वाले लोगों में आत्महत्या जैसे विचार नहीं आते हैं तो लोग उनके समक्ष खड़े नजर आते हैं।

मुकेश शर्मा Reporting
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