मेट्रो ट्रेन दौड़ाने में काटे 1500 पेड़

मेट्रो का दावा लगाए दस हजार पौधे

अहमदाबाद. अहमदाबाद के मेट्रो प्रोजेक्ट में अब तक जहां 1500 पेड़ काटे गए हैं वहीं करीब दस हजार पेड़ रोपे गए हैं। वहीं 346 ऐसे पेड़ हैं जिनको महानगरपालिका की मदद से उन पेड़ों को विजयनगर से राणीप के बीच रेलवे लाइन के किनारे, वासणा बैरेज और कोतरपुर क्षेत्र में फिर से लगाए गए हैं। गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (जीएमआरसी) ने सूचना के अधिकार में यह जानकारी सामने आई है। आरटीआई एक्टीविस्ट प्रवीण राठौड़ ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि मेट्रो प्रोजेक्ट में सिर्फ 1500 पेड़ नहीं बल्कि चार हजार पेड़ काटे गए हैं। केवल दो हजार पेड़ तो एपरेल पार्क डिपो में ही काटे गए हैं। यह भी तर्क गले नहीं उतरता कि पेड़ साइंस सिटी और ग्यासपुर में लगाए गए हैं। जहां पेड़ों को काटा गया वहां ही दूसरे पेड़ लगाने चाहिए।
गुजरात मेट्रो से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 30 अप्रेल तक करीब 1545 पेड़ काटे गए, जिसमें ग्यासपुर डिपो से श्रेयस सोसायटी तक 196, श्रेयस से वाडज तक 692 और वस्राल गांव से थलतेज तक 657 पेड़ों को काटा गया। वहीं महानगरपालिका के बगीचा विभाग ने जहां ग्यासपुर में 9 हजार से ज्यादा पेड़ रोपे हैं। वहीं थलतेज साइंस सिटी क्षेत्र में 750 पौधे लगाए। जबकि 346 ऐसे पौधे हैं, जो महानगरपालिका के बगीचा विभाग ने विजयनगर से राणिप के बीच रेलवे लाइन के किनारे और वासणा बैरेज तथा कोतरपुर इलाके में फिर से लगाए गए। वहीं ग्यासपुर से मोटेरा तक जहां 1991 पेड़ काटने थे, लेकिन पेड़ों को बचाया गया, जिसमें सिर्फ 757 पेड़ों को ही काटा गया। वहीं वस्राल गांव से थलतेज गांव तक जहां 804 पेड़ों को काटने की जरूरत थी, वहीं सिर्फ 147 पेड़ों को ही काटा गया।
पौधों को रोपने की जिम्मेदारी महानगरपालिका के गार्डन विभाग के पास हैं। यदि एक पेड़ काटा जाता है तो उसके लिए दस पेड़ लगाए हैं और ढाई हजार रुपए प्रति पौधे के हिसाब से महानगरपालिका को गुजरात मेट्रो रेल प्रोजेक्ट उपलब्ध कराए है। महानगरपालिका ने अब तक 9750 पौधे रोपे हैं, जिसमें ग्यासपुर में 9 हजार और थलतेज साइंस सिटी में 750 पौधे रोपे गए। महानगरपालिका अभी भी पौधे रोप रही है।
गुजरात मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के मुख्य महाप्रबंधक अमित गुप्ता ने बताया कि पेड़ों के काटने में सभी नियमों का पालन किया गया है। जो भी पेड़ काटे गए हैं उसके दस गुना पेड़ रोपे भी गए हैं। पेड़ों का रखरखाव भी किया जा रहा है। इसके बावजूद, यदि कोई असमंजस है तो कोई भी उन पौधों को वहां जाकर देख सकता है।

Pushpendra Rajput
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