राज्य में कागजों पर चल रहे ढाई हजार स्कूल

बोर्ड की सामान्य सभा में उठा मुद्दा

By: nagendra singh rathore

Published: 12 Oct 2018, 11:44 PM IST

अहमदाबाद. गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) से मंजूरी लेने के बाद कुछ सालों में ही बंद हो चुके ढाई हजार स्कूल आज भी कागजों में चल रहे हैं। एक साल पहले इनकी संख्या २८,०० के करीब थी। एक साल में सिर्फ ३५० स्कूल ही बंद हुए हैं।
जीएसईबी की गांधीनगर स्थित ऑफिस में हुई सामान्य सभा में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रश्न पूछने वाले बोर्ड के सदस्य प्रियवदन कोराट ने बताया कि उन्हें जानकारी दी गई है कि अभी राज्य में ढाई हजार स्कूल हकीकत में बंद हैं, जबकि कागजों में वे आज भी चल रहे हैं। यह मुद्दा उन्होंने काफी समय पहले उठाया है। लेकिन एक साल में सिर्फ ३५० स्कूलों को ही बंद किया जा सका। शेष ढाई हजार स्कूलों को तत्काल बंद करने के लिए प्रत्येक जिले के जिला शिक्षा अधिकारी से इस बाबत रिपोर्ट मंगाई जाएगी। सामान्य सभा की बैठक में बताया गया कि दसवीं के बोर्ड कार्यालय को वडोदरा से गांधीनगर में ३१ अक्टूबर तक पूरी तरह से स्थानांतरित कर लिया जाएगा। तीन साल पहले इस बाबत आधिकारिक निर्णय हो गया था।
संस्कृत के प्रश्न-पत्र में गुजराती में होगी सूचना
दसवीं और 12वीं कक्षा में संस्कृत के प्रश्न-पत्रों में अब गुजराती में सूचना दी जाएगी। अभी तक पूरा पेपर और उसकी सूचना भी संस्कृत भाषा में ही दी जाती थी। इसके चलते कई विद्यार्थियों को समझने में दिक्कत होती थी।

बैठक में बोर्ड सदस्यों में तूतू-मैं-मैं
मार्च-२०१८ में 12वीं विज्ञान संकाय की परीक्षा देने वाली सभी विषयों में डिक्टेंसन के साथ उत्तीर्ण लेकिन एक विषय में अनुत्तीर्ण छात्रा चारवी पटेल का मुद्दा भी उठा। छात्रा को न्याय दिलाने का मुद्दा विधायक एवं सदस्य ललित वसोया ने उठाते हुए कहा कि उसे न्याय दिलाना चाहिए। इस मामले में बोर्ड अध्यक्ष ए जे शाह के ज्यादा कुछ स्पष्टता नहीं करने के चलते ज्यादातर सदस्यों ने सभा का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष और परीक्षा समिति के चुनिंदा दो सदस्यों की एक समिति इस मामले में गठित करने की बात हुई। इसको लेकर दो गुट आपस में आमने सामने आ गए, जिसमें जमकर तूतू-मैंमै हुई। बोर्ड सदस्य की मानें तो हाथापाई तक नोबत आ गई थी। आखिरकार तय हुआ कि उसे न्याय दिलाने के लिए बोर्ड अध्यक्ष और परीक्षा समिति के सभी सदस्यों की समिति इस मामले को देखेगी और फैसला लेगी। प्राथमिक जांच में सामने आया कि छात्रा की ओएमआर शीट बदल गई थी। उसके चलते वह एक विषय में फेल हो गई।

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