३० लाख में फर्जी पासपोर्ट बने, विदेश भेजने वाले चार गिरफ्तार

फर्जी पासपोर्ट बनाकर लोगों को विदेश भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अहमदाबाद, मुं

By: मुकेश शर्मा

Published: 22 Aug 2017, 10:46 PM IST

अहमदाबाद।फर्जी पासपोर्ट बनाकर लोगों को विदेश भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अहमदाबाद, मुंबई और दमण से पकड़े आरोपियों ने कबूला कि इसके लिए वह १८ से ३० लाख रुपए लेते थे।

एटीएस के पुलिस उपाधीक्षक आर.सी.फळदू ने बताया कि अहमदाबाद राणीप रूपल अपार्टमेंट निवासी जितेन्द्र पटेल, संजय पटेल, दमण मोटी दमण मांगेल्वाड निवासी प्रवीण मांगेला और मुंबई निवासी खालिद को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में मूल पोरबंदर के रहने वाले लेकिन फिलहाल ब्रिटेन में स्थाई प्रताप ओडेदरा का भी नाम सामने आया है। वह अभी फरार है।

एटीएस को सूचना मिली थी कि दमण निवासी प्रविण अहमदाबाद निवासी जितेन्द्र से मिलने के लिए सीटीएम एक्सप्रेस हाईवे तिराहे पर आने वाला है। सूचना के आधार पर ही एटीएस टीम ने इन दोनों को पकड़ा। इनके पास से आठ फर्जी पासपोर्ट बरामद किए गए। इसमें से तीन पासपोर्ट प्रविण ने जितेन्द्र को देने थे, जबकि पांच जितेन्द्र, प्रविण को देने वाला था। फलदू ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया कि यह करीब चार साल से नेटवर्क चला रहे थे। करीब ७० लोगों के फर्जी पासपोर्ट इन्होंने बनाए हैं।

ज्यादातर पोरबंदर के युवाओं के पासपोर्ट बनाए हैं। जो लोग यूरोपीय देशों में जाना चाहते थे। वह सबसे पहले पोरबंदर के मूल निवासी प्रताप का संपर्क करते थे। प्रताप इस मामले में अहमदाबाद के जितेन्द्र को बताता था। जितेन्द्र मुंबई निवासी खालिद को इसकी जानकारी देता था। खालिद उस व्यक्ति के लिए दमण निवासी प्रविण मांगेला की मदद से फर्जी पासपोर्ट तैयार करता था। फिर जितेन्द्र संजय के जरिए इन फर्जी पासपोर्ट को प्राप्त करता था।

दीव-दमण निवासी बताकर बनवाते पासपोर्ट, भेजते पुर्तगाल

प्राथमिक जांच में सामने आया कि यह लोग १९६० से पहले दीव, दमण में स्थाई हो चुके लोगों के परिजनों के नाम पर विदेश जाने वाले व्यक्ति का फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाते। उस पासपोर्ट में नाम दीव में रहने वाले व्यक्ति के परिजन का होता था, जबकि फोटो उस व्यक्ति का जिसे विदेश जाना होता था।

पासपोर्ट बन जाने पर यह लोग सबसे पहले उस व्यक्ति को पुर्तगाल भेजते थे। क्योंकि १९६० से पहले दीव, दमण में रहने वाले लोगों को पुर्तगाल की नागरिकता प्राप्त है। जिससे इस पासपोर्ट से पुर्तगाल जाने पर ऑन अराइवल वीजा आसानी से मिल जाता था। इसके बाद उस व्यक्ति को इंडोनेशिया, बैंकॉक व अन्य देशों में भेजते फिर यूरोपीय देशों में, तुर्की भेजकर वहां पर प्रताप उन्हें स्थायी होने में सहायक होता था।

 

मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned