script6 universities of Gujarat will teach courses in natural farming | Gujarat Natural Farming Agriculture गुजरात के 6 विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे | Patrika News

Gujarat Natural Farming Agriculture गुजरात के 6 विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे

  • नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार और कृषि वैज्ञानिकों की समिति ने की बैठक
  • प्राकृतिक खेती की पढ़ाई निश्चत तौर पर भारत को विश्वगुरु बनाएगी : राज्यपाल

अहमदाबाद

Updated: July 24, 2022 10:52:48 am

पालनपुर. गुजरात की चार कृषि विश्वविद्यालय समेत दो अन्य विश्वविद्यालय में आगामी दिनों में प्राकृतिक खेती की पढ़ाई शुरू की जाएगी। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार (कृषि) और कृषि वैज्ञानिकों की समिति ने इस संबंध में गांधीनगर स्थित राजभवन में निर्णायक बैठक की। इसमें प्राकृतिक कृषि के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
Gujarat Natural Farming Agriculture गुजरात के 6 विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे
Gujarat Natural Farming Agriculture गुजरात के 6 विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे
बैठक में कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश पुरी, राज्यपाल के प्रधान सचिव मुकेश पुरी, राज्यपाल के प्रधान सचिव राजेश मांझु, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार (कृषि) डॉ नीलम पटेल समेत विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति मौजूद रहे। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर का पढ़ाई राज्य के 6 विश्वविद्यालय में कराई जाएगी। इसके पाठ्यक्रम में प्राचीन काल से अभी तक के सभी विषयों का विस्तार और गहराईपूर्वक अभ्यास कर समावेश किया गया है। कई किसानों के अनुभवों का भी शामिल किया गया है।
साथ ही वैज्ञानिकों के शोध और संदर्भों का सार तत्व लिया गया है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय बीज को अधिक उत्कृष्ठ बनाने के साथ विश्वविद्यालय स्तर पर इसका सरंक्षण जरूरी है। प्राकृतिक खेती पर पीएचडी करने के लिए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने आगामी समय प्राकृतिक खेती का बताते हुए कहा कि विश्व स्तर पर इस तरह की खेती की आवश्यकता महसूस होगी। तब भारत पूरी दुनिया को प्रेरणा दे सकेगा। उन्होंने गुजरात और हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती के मिशन का नेतृत्व करने का आह्वान किया।
राज्य के चार कृषि विश्वविद्यालयों में सरदार कृषि नगर दांतीवाडा, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, आणंद कृषि विश्वविद्यालय, जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय और गुजरात प्राकृतिक एवं जैविक कृषि विश्वविद्यालय समेत गुजरात विश्वविद्यालय का समावेश है।
इन पाठ्यक्रमों में मिलेगी डिग्री
गुजरात में बी.एस.सी. (एग्रीकल्चर) में प्राकृतिक खेती का विषय पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। एमएससी प्राकृतिक खेती से की जा सकेगी। गुजरात के सभी चार कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात विश्वविद्यालय और प्राकृतिक व जैविक कृषि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती का तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया जा सकता है।
किसानों के लिए भी तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स
तीन महीने के इस कोर्स में कोई भी किसान या अन्य किसी भी व्यक्ति को प्रवेश मिले इस तरह की व्यवस्था बनाई जाएगी।
इसके अलावा सभी यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक खेती पर विद्यार्थी पीएचडी भी कर सकेंगे। गुजरात के अलावा हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में भी प्राकृतिक कृषि स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर का पाठ्यक्रम शामिल करने का विचार किया गया है।
इस साल फरवरी में बनी थी समिति
राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती को कृषि यूनिवर्सिटी व अन्य यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए फरवरी, 2022 में नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार (कृषि) डॉ नीलम पटेल की अध्यक्षता में 7 सदस्यों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था।
पिछले 5 महीने के दौरान इस समिति ने गुजरात के राजभवन में कई बैठक, ऑनलाइन मीटिंग, गुजरात, हिमाचल और हरियाणा के किसानों के साथ मुलाकात कर, अन्य देशों के कृषि पाठ्यक्रम का अभ्यास किया। इसके बाद कई तरह के शोध कर तैयार किए गए पाठ्यक्रम को गुजरात, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के कृषि यूनिवर्सिटी के कुलपतियों को भेजा। सभी विषय विशेषज्ञों ने इस पाठ्यक्रम का अभ्यास किया।
2.5 लाख करोड़ का यूरिया और डीएपी खाद का आयात
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि भारत हर साल 2.5 लाख करोड़ रुपए यूरिया और डीएपी खाद आयात में खर्च कर रहा है। रासायनिक खाद के पीछे इतनी बड़ी रकम खर्च कर हम जहर खरीद रहे हैं। धरती को जहरीला बना कर उपज के तौर पर प्राप्त चावल को खाकर कैंसर जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग, अतिवृष्टि या अनावृष्टि को दूसरा कोई इलाज मानव के पास नहीं है। प्राकृतिक खेती के जरिए हम पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोक सकते हैं। इससे जमीन में कार्बनिक पदार्थ बढ़ेगा। युनेस्को की एक रिपोर्ट का जिक्र कर उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी और कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग से आगामी 50 वर्ष के बाद विश्व की धरती अनुपजाऊ हो जाएगी।

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