Ahmedabad News : कोरोना का 90 प्रतिशत असर फेफड़ों पर : डॉ. रावल

नाक व हाथ से ही शरीर में प्रवेश करता है कोरोना का वायरस

हाथ, कान, नाक, आंख व मुंह को संभाल कर रखें

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 23 Aug 2020, 11:18 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना का अधिक से अधिक असर फेफड़ों पर होता है। कोरोना 90 प्रतिशत असर फेफड़ों पर करता है। नाक व हाथ से ही कोरोना का वायरस शरीर में प्रवेश करता है। इनके अलावा कोरोना वायरस किसी भी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश नहीं करता है।
गुजरात के वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन व एसोसिएशन ऑफ चेेस्ट फिजिशियन ऑफ गुजरात के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र रावल ने यह बात कही। लायंस क्लब डिस्ट्रिक्ट 3232 ए व बी की ओर से आयोजित हैल्थ वेबिनार में उन्होंने कहा कि हाथ, कान, नाक, आंख व मुंह को संभाल कर रखना चाहिए।

घर से बाहर नहीं निकलने पर कोरोना कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस को लोग घर से बाहर पकडऩे जाते हैं। घर से बाहर निकलकर, उत्सवों में, विवाह समारोहों में, होटलों में, सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोग कोरोना को पकड़कर घरों में लाते हैं। घर से बाहर नहीं निकलने पर कोरोना लोगों का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता।

विश्व में गुजरात में सर्वाधिक टीबी के रोगी कोरोना से पीडि़त

डॉ. रावल ने कहा कि नाक से शरीर में प्रवेश करने के बाद वायु कोषों में जाकर कोरोना के वायरस पेट में पहुंचता है। यह वायरस फेफडों में जाकर निमोनिया, रक्त के परागकणों को तोड़कर रक्त के छोटे-छोटे थक्के (क्लॉट) बनाता है। फेफड़ों के रोगियों में विशेष तौर पर श्वास के रोगियों को कोरोना होने की संभावना अधिक है। फेफड़ों के रोगियों की भांति कोरोना संक्रमण होने पर भी श्वास चढ़ता है और खांसी आती है। विश्व में गुजरात में सर्वाधिक टीबी के रोगी कोरोना से पीडि़त हैं।

गुजरात में 20 से अधिक चिकित्सकों की मौत कोरोना से

उन्होंने कहा कि गुजरात में 20 से अधिक, भारत में 150 से अधिक और विश्व में करीब 1900 से अधिक चिकित्सकों की मौत कोरोना के कारण हुई है। इनके अलावा बड़ी संख्या में पैरा मेडिकल स्टाफ की भी मौत कोरोना के कारण हुई है। कोरोना एक भयानक रोग है। कमजोर रोग प्रतिरोधक शक्ति व अधिक उम्र के लोगों को कोरोना होने की संभावना अधिक है। कोरोना की जानकारी नहीं होने पर यह लोगों को मौत की नींद सुला सकता है, इससे सचेत रहने की आवश्यकता है।

एसएमएस व सुमन का उपयोग करें

डॉ. रावल ने कहा कि साबुन या सेनेटाइजर - घरों में कम से कम 10-15 बार सुमन यानी सामने से, उल्टे से, मध्य से, अंगूठे, नाखुन को कम से कम पांच-पांच सेकेंड सहित कुल 20 मिनट तक साबुन से घिसकर या हाथ घोन चाहिए, बाहर जाने पर इसी प्रकार सेनेटाइजर का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ को एन 95 मास्क और सामान्य नागरिकों को सर्जिकल मास्क या सूती कपड़े से बने मास्क पहनने चाहिए। सोशल डिस्टेन्स का पालन करना चाहिए, मित्रों के साथ नजदीक से बात नहीं करनी चाहिए। इनके अलावा प्रत्येक व्यक्ति को 24 घंटों में एक लीटर दूध सहित कुल 4 लीटर तरल पदार्थ यानी लिक्विड का सेवन करना चाहिए।
डॉ. रावल ने कहा कि खाने-पीने से एसीडिटी नहीं होने के बारे में विशेष ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा आंतों का कोरोना होने की संभावना बढ़ती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, थोड़ी मात्रा में घी, मक्खन का सेवन करना चाहिए और कोरोना संबंधी नकारात्मक समाचारों से बचना चाहिए।

Rajesh Bhatnagar
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