'अहंकार और ममकार की ग्रंथि का भेद है कायोत्सर्ग'

'अहंकार और ममकार की ग्रंथि का भेद है कायोत्सर्ग'
'अहंकार और ममकार की ग्रंथि का भेद है कायोत्सर्ग'

Rajesh Bhatnagar | Updated: 11 Oct 2019, 11:00:20 PM (IST) Ahmedabad, Ahmedabad, Gujarat, India

प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला के पहले दिन साध्वी रतनश्रीजी ने कहा

अहमदाबाद. साध्वी रतनश्रीजी ने कहा कि कायोत्सर्ग अहंकार और ममकार की ग्रंथि का भेद है। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के तत्त्वावधान में एवं श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की अहमदाबाद पश्चिम इकाई की ओर से आयोजित तीन दिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला के पहले दिन शुक्रवार को उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ ने कहा था कि आत्मा हमारे शरीर के भीतर है, उसको निर्मल एवं पवित्र बनाने के लिए मन का संतुलन अपेक्षित है। मन का संतुलन तब होता है जब साधक में पूर्ण एकाग्रता का अभ्यास हो। इसके अभ्यास के लिए कायोत्सर्गा एक प्रयोग है यानी शिथिलीकरण। जब हम किसी भी प्रकार का ध्यान करते हैं तो पूरे शरीर को रिलैक्स करना जरूरी है। शारीरिक-मानसिक तनावों से मुक्ति पाने के लिए कायोत्सर्ग का प्रयोग किया जाता है। कायोत्सर्ग वही क्षण है जब अहंकार और ममकार की ग्रंथि का भेद होता है। हम प्रयोग करें और ध्यान की गहराई में जाकर उतरें ताकि हमारे भीतर जो कर्मों की मलीनता है वह निर्मलता में बदल जाए।
सूरत से आए प्रेक्षा प्रशिक्षक महेन्द्र सुराणा ने योगिक क्रियाएं, आसन एवं अर्हम् की ध्वनि का प्रयोग करवाते हुए उसके लाभ की विस्तार से जानकारी दी। साध्वी रमापति ने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। कार्यशाला की निर्देशिका साध्वी हिमश्रीजी ने कहा कि ध्यान करने से पूर्व व्यक्ति अपने दृष्टिकोण को साफ करें क्योंकि दृष्टिकोण जितना स्पष्ट एवं साफ होगा, शांति का मार्ग उतना ही प्रशस्त होगा। समाज में मनुष्य के हृदय में और मनुष्य के मस्तिष्क में शांति हो तब उसका कुछ मूल्य होता है, वह तभी प्राप्त होगी जब दीर्घ श्वास का निरंतर अभ्यास होगा।
साध्वी हिमश्रीजी एवं साध्वी चैतन्ययशा ने प्रेक्षा गीत 'आत्म साक्षात्कार प्रेक्षाध्यान के द्वारा' प्रस्तुत कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में साध्वी मुक्तियशा, साध्वी चैतन्ययशा एवं साध्वी मोक्षप्रभा ने भावनात्मक विचारों की प्रस्तुति दी। संयोजक मितेश पारीख और रेखा कोठारी ने संचालन और आभार व्यक्त किया। सभी प्रशिक्षकों को महासभा की ओर से भेजी गई किट का वितरण किया गया। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की अहमदाबाद पश्चिम इकाई के अध्यक्ष लूणकरण सांड ने सभी का स्वागत किया। कार्यशाला के सहयोगी सुरेश हीरालाल दक थे।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned