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Ahmedabad: विशेष अदालत की टिप्पणी... जेहाद एक पवित्र शब्द, लेकिन इन संगठनों ने दुष्प्रचार कर किया इसका लगातार दुरुपयोग

Ahmedabad, bomb blast case, Jihad, Special court, observation

अहमदाबाद

Updated: February 21, 2022 06:24:11 pm

अहमदाबाद. अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों (Ahmedabad bomb blast case) में विशेष अदालत (Special court) ने 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा (death penalty) सुनाई। फांसी की सजा सुनाते हुए विशेष अदालत के जज अंबालाल आर पटेल ने यह कहा कि जिहाद एक पवित्र शब्द है लेकिन भारत के कानून के खिलाफ और राष्ट्र विरोधी आतंकवादी प्रवृत्ति करने वाले मुस्लिम आतंकवादी संगठनों की ओर से जिहाद शब्द का दुष्प्रचार कर दुरुपयोग किया गया। गैर कानूनी प्रवृत्ति करने वाले मुस्लिम आतंकवादी संगठनों की ओर से निर्दोष मुस्लिम युवाओं के मस्तिष्क में जिहाद के नाम पर देश के खिलाफ और समाज को छिन्न भिन्न करने वाली आतंकी प्रवृत्ति करते हैं और करते रहे हैं।
Ahmedabad: अहमदाबाद बम ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत की टिप्पणी... जेहाद एक पवित्र शब्द, लेकिन मुस्लिम आतंकी संगठनों ने दुष्प्रचार कर किया इसका लगातार दुरुपयोग
Ahmedabad: अहमदाबाद बम ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत की टिप्पणी... जेहाद एक पवित्र शब्द, लेकिन मुस्लिम आतंकी संगठनों ने दुष्प्रचार कर किया इसका लगातार दुरुपयोग
7014 पेज के अपने फैसले में अदालत ने यह कहा कि पवित्र कुरान में विश्वास रखने वाली सच्ची मुस्लिम संस्थाओं को जिहाद शब्द का सच्चा प्रचार कर इस शब्द के दुरुपयोग होने से रोकना चाहिए। पवित्र कुरान में विश्वास रखने वाले मुस्लिम संस्थाओं को आतंकवादी मुस्लिम संगठनों का बहिष्कार करना चाहिए।
इन दोषियों ने जिहाद शब्द के लिए कुरान की आयतों का आधार लिया है। साथ ही जिहाद और आतंकवाद के बीच अंतर की चर्चा की है। इन आरोपियों ने समाज की शांति को अशांति में परिवर्तित कर समाज में डर और भय का माहौल पैदा किया, इसलिए इस कारण समाज में इन्हें रखना उचित नहीं है।
इसलिए सुनाई फांसी की सजा

विशेष अदालत के मुताबिक ये आरोपी देश में रहकर देश के खिलाफ आतंकवादी प्रवृत्ति करते आए हैं, इसलिए देश को उन्हें जेल में रखने की भी जरूरत नहीं है। इसके बावजूद भी यदि इन आरोपियों को समाज में रखा गया तो आया है ये मानव भक्षी तेंदुए के समान समझे जाएंगे।
ऐसे लोगों की पर छाया पड़ना भी आया समाज के लिए काफी खतरनाक है। इन आरोपियों ने समाज के निर्दोष लोगों के प्रति कोई दया भाव रखा नहीं है। इसलिए अदालत को भी इन आरोपियों पर किसी तरह के दया भाव रखने की जरूरत नहीं है
विशेष जज के मुताबिक ऐसी आतंकी प्रवृत्ति करने वाले आरोपियों को मृत्युदंड की सजा ही एकमात्र और आखिरी विकल्प है। आरोपियों का इतिहास अपराध से भरा पड़ा है। देश और देश के लोगों की सुरक्षा और शांति के लिए ऐसे आरोपियों को कानून में निहित प्रावधान के मुताबिक की अधिकतम सजा करनी चाहिए।
हिंसा या आतंकवादी प्रवृत्ति में निर्दोष लोगों के मारे जाने के बाद उनके परिवारों की देखरेख के लिए सरकार को अलग से विभाग शुरू करना चाहिए, जिससे पीड़ित और उनके परिवारों को सरकार और कानून पर विश्वास बना रहे।

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