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शहरों में पशुओं के पंजीकरण विधेयक को वापस ले सकती है गुजरात सरकार

ahmedabad city news, Gujarat, C R Patil, bhupendra patel, maldhari गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पाटिल ने दिए संकेत, पशुपालकों के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के बाद मांग में बताया दम, मनपा के कानून आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त

अहमदाबाद

Published: April 04, 2022 05:29:38 pm

अहमदाबाद. गुजरात के महानगरों में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या को काबू में करने के लिए बजट सत्र के अंतिम दिन बहुमत से पारित किए गए गुजरात शहरी इलाकों में मवेशी नियंत्रण (रखना व हेराफेरी) विधेयक-2022 को लेकर जारी पशुपालकों के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार इसे वापस ले सकती है।
गुजरात प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सी आर पाटिल ने सोमवार को इसके संकेत दिए हैं।
पशुपालकों (मालधारी समाज) के एक प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को पाटिल से मुलाकात की। नए विधेयक को लेकर नाराजगी जताई और इसे वापस लेने या फिर इसमें संशोधन करने की मांग की है। जिसमें शहरी इलाकों में मवेशियों (पशुओं) को रखने के लिए लाइसेंस लेने की अनिवार्यता और दंड व जेल जैसे कड़े प्रावधानों का विरोध किया है।
पाटिल ने संवाददाताओं को बताया कि मालधारी समाज (पशुपालकों) के प्रतिनिधि मंडल की ओर से उठाए गए मुद्दे और उनकी मांग में दम है। उन्होंने खुद इस मामले में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल से बात की है।
दरअसल विधेयक लाने के बाद से ही राज्यभर के पशुपालकों में रोष है। इसको लेकर गांधीनगर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
शहरों में पशुओं के पंजीकरण विधेयक को वापस ले सकती है गुजरात सरकार
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केन्द्रीय गृहमंत्री ने भी मांग का किया समर्थन
पाटिल ने बताया कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी पशुपालकों की मांग को जायज बताया है। शाह ने भी इस नए विधेयक को वापस लेने की भावना व्यक्त की है। पाटिल ने कहा कि इसे देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल से विनती की है कि सरकार इस नए विधेयक पर पुन: विचार करे। संभव है कि सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस विधेयक को वापस ले सकती है।
घर-घर लाइसेंस लेना योग्य नहीं
पाटिल ने कहा कि महानगर पालिकाओं के मौजूदा कानून आवारा पशुओं की समस्या पर काबू पाने के लिए पर्याप्त हैं। उसमें जो दंड और सजा के प्रावधान हैं, वह भी पर्याप्त हैं। ऐसे में नए विधेयक में जो दंड और सजा के प्रावधान किए हैं, उसके तहत घर-घर गाय-पशु के लिए घर-घर लाइसेंस लेना होगा। ऐसा करना योग्य नहीं है।
ये प्रावधान हैं नए विधेयक में
गुजरात शहरी इलाकों में मवेशी नियंत्रण (रखना व हेराफेरी) विधेयक-2022 के प्रावधान के तहत शहरी इलाकों में मवेशियों को रखने के लिए लाइसेंस जरूरी। कानून लागू होने के 90 दिनों के भीतर पशुपालकों को लाइसेंस लेना होगा। सभी मवेशियों को टैग लगाने होंगे। लाइसेंस मिलने के पन्द्रह दिनों के यह टैग भीतर लगवाना होगा। कानून का उल्लंघन करने वाले पशुपालकों को एक वर्ष की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही कम से कम पांच हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक के जुर्माना का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रतिबंधित क्षेत्रों में घास-चारा की बिक्री करने पर प्रतिबंध का भी प्रावधान किया जाएगा।

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