रीढ़ की हड्डी की पुन: सर्जरी कर किशोरी को दिया जीवन दान

निजी अस्पताल में लाखों का खर्च हुआ लेकिन आराम नहीं मिला
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने दिलाई पीड़ा से मुक्ति

By: Omprakash Sharma

Updated: 17 Jun 2021, 09:53 PM IST

अहमदाबाद. रीढ़ की हड्डी में चोट लगना काफी गभीर समस्याओं में से एक है। राजकोट की एक किशोरी इस समस्या से दो वर्ष से पीडि़त थी। पूर्व में वह एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन भी करा चुकी है लेकिन समस्या का अंत आने की जगह और बढ़ गई। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने कोरोना काल की विकट परिस्थितियों में भी इस किशोरी का ऑपरेशन कर पीड़ा से मुक्ति दिलाई। पुन: रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया और अब उसे छुट्टी भी दे दी गई।
राजकोट निवासी 17 वर्षीय सोनलबेन को दो वर्ष पूर्व एक दुर्घटना में कमर के ऊपर रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। इसके लिए राजकोट के ही एक निजी अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया था। लेकिन दर्द से मुक्ति नहीं मिली। इस किशोरी का जिस जगह ऑपरेशन किया गया था उसमें संक्रमण लग गया था। इसके अलावा दर्द से भी कोई राहत नहीं मिली। दूसरी बार फिर से उसी निजी अस्पताल में ले जाया गया जहां के चिकित्सकों ने पांच लाख रुपए का खर्च बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। लेकिन मध्यम वर्गीय सोनल के परिजन इस खर्च को करने में असमर्थ थे। इसके बाद इस किशोरी को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया। यहां के ऑर्थोपेडिक एवं स्पाइन सर्जन (हाल मेें चिकित्सा अधीक्षक) डॉ. जेवी. मोदी एवं उनकी टीम ने किशोरी का पुन: जटिल ऑपरेशन किया। इसके बाद उसकी तबीयत में लगातार सुधार हुआ और अब उसे छुट्टी भी दे दी गई।

कोरोना काल में विपरीत स्थितियों में किया ऑपरेशन
यह ऑपरेशन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किया गया जब अस्पताल में विकट स्थिति थी। सोनलबेन के पूर्व में किए गए ऑपरेशन के सभी स्क्रू निकाले गए थे और दूसरे स्थापित किए गए। कोविड संक्रमित मरीजों के अलावा नॉन कोविड मरीजों के उपचार पर भी ध्यान दिया गया था। यही कारण है कि विकट स्थिति में भी सिविल अस्पताल में 400 से अधिक स्पाइन संबंधित ऑपरेशन किए गए।
डॉ. जे.वी. मोदी चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल

Omprakash Sharma Reporting
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