Ahmedabad News : राजकोट के सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमित 180 मरीज ले रहे हैं मास प्रोनिंग थैरेपी

  • कोरोना संक्रमण के कारण मरीजों के फेफड़ों पर होता है सबसे खराब असर
  • ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मिलती है मदद

By: Binod Pandey

Published: 03 Dec 2020, 11:05 PM IST

राजकोट. राजकोट के सिविल अस्पताल में उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीज बकुलेशभाई (63) का कहना है कि चार दिन पहले बोलने या खड़े होने तक की शक्ति नहीं थी, श्वास लेने में तकलीफ थी। खुशीपूर्वक उन्होंने कहा कि अस्पताल में रोजाना भोजन के साथ तीन समय कसरत करवाकर बोलने और चलने की शक्ति वापस ला दी गई।
अस्पताल में पिछले पांच महीने से फिजियोथैरेपिस्ट के तौर पर सेवा दे रही डॉ. मिराली चग का कहना है कि कोरोना संक्रमित कई मरीजों को श्वास लेने में तकलीफ होती है। कोरोना संक्रमण के कारण मरीजों के फेफड़ों पर सबसे खराब असर होता है जिससे श्वसनतंत्र को सामान्य करना सर्वाधिक जरूरी होता है। सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और फिजियोथैरेपी की टीम वर्तमान में कोरोना संक्रमित 180 मरीजों को दिन में तीन बार प्रोनिंग थैरेपी और कसरत करा रही है।

Ahmedabad News : राजकोट के सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमित 180 मरीज ले रहे हैं मास प्रोनिंग थैरेपी

ऐसी है प्रोनिंग थैरेपी

प्रोनिंग थैरेपी के बारे में डॉ मिराली ने बताया कि इसके जरिए मरीज को सीने के बल पर उल्टा सुलाकर पेट के बल रखा जाता है। इस अवस्था में उल्टा श्वास लिया जाता है। ऐसा करने से मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की अधिक मात्रा जाती है। दिन में दो से तीन बार एक घंटे के लिए यह प्रक्रिया करने से मरीज को राहत मिलती है।

खुद को कोरोना संक्रमित होने के बाद प्रोन थैरेपी से स्वस्थ होने में मिली मदद

अनुभव बांटते हुए डॉ. मिराली ने बताया कि दिवाली के समय वे भी कोरोना संक्रमित हुई थीं। उन्होंने होम आइसोलेशन के दौरान रोजाना प्रोन ैथैरेपी ली, जिससे उन्हें स्वस्थ्य होने में मदद मिली।

कई मरीज जीवन में पहली बार कर रहे कसरत

प्रोनिंग थैरेपी के अलावा मरीजों की नसों में जकडऩ को दूर करने के लिए कसरत कराई जाती है, इससे शरीर में खून का प्रवाह बढ़ता है। कोविड अस्पताल में इलाज करा रहे कई मरीज जीवन में पहली बार कसरत कर रहे हैं। शुरुआत में उन्हें यह सब अजीब लगता है, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भी इसकी आदत हो रही है। मरीज कल्पेश कुकडिया ने बताया कि यहां प्रोन थैरेपी से उन्हें खास फायदा हुआ। सिविल अस्पताल में नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ ने काफी सहयोग किया।

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