Ahmedabad News : आलू की पैदावार से सालाना 3 करोड़ से अधिक का टर्नओवर

  • लीक से हटकर की खेती तो हुए मालामाल
  • सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को मिल रहे हैं फायदे
  • प्रति एकड़ उत्पादन से फोब्र्स की सूची में दर्ज करा चुके हैं नाम

By: Binod Pandey

Published: 16 Dec 2020, 12:33 AM IST

राजेन्द्र धारीवाल/बिनोद पाण्डेय

पालनपुर. गुजरात के बनासकांठा जिले के छोटे से गांव के एक किसान ने परंपरागत खेती से हटकर खेती के जरिए आमदनी में रिकार्ड कायम किया है। दांतीवाड़ा तहसील के चार हजार आबादी वाले गांव डांगिया में सेवानिवृत पुलिस अधिकारी परथी भाई चौधरी आलू की खेती कर सालाना तीन करोड़ रुपए से अधिक की कमाई करते हैं। प्रति एकड़ सर्वाधिक आलू का उत्पादन कर फोब्र्स पत्रिका में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं। आज वे किसानों के लिए मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनसे गुर सीखकर दूसरे अन्य लोग भी नए तरीके की खेती को अपनाने लगे हैं।

गुजरात पुलिस में सब इंस्पेक्टर से पुलिस उपाधीक्षक तक का सफर तय करने वाले परथीभाई ने अपनी पुश्तैनी खेती की जमीन पर आलू की खेती शुरू की। अपनी मेहनत, तकनीक और आधुनिक खेती के तौर-तरीके के इस्तेमाल ने उन्हें शीघ्र ही इस क्षेत्र का भी अगुवा बना दिया। वार्षिक टर्न ओवर और प्रति एकड़ अधिक पैदावार के चलते उनके नाम रिकार्ड दर्ज हो गए।

उनके पिता जेठा भाई चौधरी वर्षों तक अपनी जमीन पर गेहूं, बाजरे आदि की परंपरागत खेती करते थे। पुत्र परथी भाई को बंटवारे में जमीन मिली। वर्ष 2004 में ही अपने हिस्से की 45 बीघे की जमीन पर उन्होंने लीक से हटकर खेती करने का विचार किया। जिले के अन्य प्रगतिशील किसानों से मिलकर उनसे आधुनिक खेती के गुर सीखे। अंतत: आलू की खेती तक उनकी तलाश आकर पूरी हो गई।

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आधुनिक तकनीक से खेती

उन्होंने अपने हिस्से के 45 बीघे जमीन पर वर्ष 2004 से पुलिस की नौकरी के साथ ही आलू की खेती शुरू की। नौकरी के दौरान जब भी वे शनिवार-रविवार की छुट्टियों में गांव आते तो खेती कार्य में जुट जाते। धीरे-धीरे इन्होंने आसपास की जमीन भी खरीद ली। मौजूद समय में उनके पास 87 एकड़ जमीन है, जिस पर वे आलू की खेती करते हैं। उन्होंने अपने खेत में आठ नलकूप खुदवा दिए, जो स्प्रिकंलर सिस्टम से जुड़े हैं। खेत की देखभाल और अन्य कार्य के लिए 16 परिवारों को रखा गया है।

चार माह में होता है तैयार

नवंबर के आरंभ में आलू की बुवाई करते हैं और चार माह में उत्पादन तैयार हो जाने पर 15 मार्च से खुदाई कर ली जाती है। इसके अतिरिक्त अप्रेल से नवंबर माह तक खेत में बाजरा, तरबूज और मूंगफली आदि की खेती की जाती है। परथी भाई के अनुसार उन्होंने कृषि विशेषज्ञ गोपाल दास शर्मा एवं देवेन्द्र से आधुनिक खेती के तौर-तरीके सीखे।

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प्रति हेक्टेयर 87 मेट्रिक टन आलू उत्पादन का रिकार्ड

परथीभाई ने मार्च 2010 में सर्वाधिक आलू उत्पादन में नीदरलैंड के एक किसान का प्रति हेक्टेयर 44 मेट्रिक टन आलू उत्पादन का विश्व रिकार्ड तोड़ा। उन्होंने प्रति हेक्टेयर 87.188 मेट्रिक टन आलू उत्पादन का रिकार्ड बनाया। तब तत्कालीन कलक्टर और कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की देखरेख में विश्व रिकार्ड के लिए कई टीमों ने उनकी खेत का दौरा किया था। इस विश्व रिकार्ड के बाद उन्हें फोब्र्स की सूची में भी उन्हें स्थान मिला।

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फिलहाल इनके खेत से प्रति हेक्टेयर 17-18 मेट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। आरंभ में सालान आय करीब 30 लाख रुपए थी। तब आलू के पांच रुपए किलो थे। अभी आलू का भाव 20-22 रुपए प्रति किलो है, वहीं आलू का उत्पादन 1500 से 1700 मेट्रिक टन तक पहुंच गया है। इसके चलते वार्षिक टर्न ओवर 3 करोड़ तक पहुंच चुका है। ख्ेाती में कुल खर्च करीब 50 से 60 लाख रुपए होता है, इसके बाद बाकी रकम शुद्ध मुनाफा होता है।
आलू के सीजन में यदि ठंडी अधिक होती है तो कुल उत्पादन 1700 मेट्रिक टन तक पहुंच जाता है। जबकि गर्मी रहने पर इसका उत्पादन 1500 टन तक पहुंच जाता है। सीजन में आलू का भाव 10 से 12 रुपए होता है, सीजन के बाद कोल्ड स्टोरेज में रखने पर इसकी कीमत 25 से 30 रुपए मिलती है।

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