Ahmedabad News : बेचरी के किसान ने मल्चिंग पद्धति से मिर्च की खेती की

उमरेठ के किसान भगवत पटेल बताते हैं कि मिर्च की खेती सिंचाई के बाद नमी बढ़ती है। इससे फसल पर अच्छा असर नहीं होता है। वहीं पानी की भी बर्बादी होती है। इसके बाद उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय में जाकर विशेषज्ञों के सहयोग से मल्चिंग पद्धति और टपक पद्धति की जानकारी प्राप्त की।

By: Binod Pandey

Updated: 10 Feb 2021, 11:16 PM IST

आणंद. जिले के उमरेठ तहसील के बेचरी गांव के किसान भगवतभाई पटेल वर्षों से तंबाकू की खेती करने के बावजूद उचित लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने नई तकनीक से खेती करने की ओर कदम बढ़ाया। कृषि विश्वविद्यालय की सलाह पर उन्होंने पांच वर्ष पूर्व मल्चिंग तकनीक से टपक सिंचाई पद्धति के साथ मिर्च की खेती शुरू की। तीन से चार गुणा से अधिक उत्पादन देखकर सभी खेतों में मल्चिंग पद्धति से खेती शुरू कर दी। राज्य सरकार की ओर से इनकी इस उपलब्धि पर दो अवार्ड प्रदान किए हैं।
सामान्य रूप से मिर्च की खेती करने पर किसान भगवत पटेल को 1500 मन का उत्पादन मिलता था, लेकिन मल्चिंग तकनीक के सहारे उनका उत्पादन बढ़कर 5000 मन हो गया। उमरेठ के किसान भगवत पटेल बताते हैं कि मिर्च की खेती सिंचाई के बाद नमी बढ़ती है। इससे फसल पर अच्छा असर नहीं होता है। वहीं पानी की भी बर्बादी होती है। इसके बाद उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय में जाकर विशेषज्ञों के सहयोग से मल्चिंग पद्धति और टपक पद्धति की जानकारी प्राप्त की। टपक सिंचाई के लिए उन्होंने प्लास्टिक की पाइप लाकर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छिद्र कर खेत में गड्ढे कर डाल दिए। इससे खेतों में जड़ों को पर्याप्त पानी मिलते रहा। वहीं मल्चिंग तकनीक के तहत आर्गेनिक वस्तुओं का उपयोग कर जरूरी छिड़काव किया जाता था। इस तकनीक के सहारे फसल को कीड़े-मकौड़ों से बचाया जाता था। इस प्रकार की खेती से उन्हें मिर्च की खेती में चार गुंणा अधिक फसल मिली। जिससे उन्होंने अपने सभी खेतों में इसी पद्धति से खेती शुरू कर दी। इससे उनकी आवक भी चार गुणा बढ़ी। सरकार ने उनकी इस उपलब्धि पर दो पुरस्कार प्रदान किए हैं।

Binod Pandey
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