Ahmadabad News : आणंद जिला पंचायत की 42 सीटों पर चुनाव, नौ पर रस्साकशी

कांग्रेस कुल 42 सीट में से 30 के आसपास जीत हासिल कर जिला पंचायत में सत्ता हासिल करने में सफल रही है। इस बार कई सीटों पर सीमांकन बदलने से कई उम्मीदवारों ने अपनी सीट छोड़कर दूसरे सीट पर जा पहुंचे हैं। स्थानीय स्वराज के चुनाव में जिला या तहसील पंचायत के चुनाव में लोगों को अधिक रुचि नहीं है। सभी मुख्य राजनीति दलों का मुख्य ध्यान नगर पालिका के चुनाव पर है।

By: Binod Pandey

Updated: 21 Feb 2021, 10:03 AM IST

आणंद. जिला पंचायत में शुरुआत के चार टर्म से दबदबा रखने वाली भाजपा को पिछले दो टर्म से कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस कुल 42 सीट में से 30 के आसपास जीत हासिल कर जिला पंचायत में सत्ता हासिल करने में सफल रही है। इस बार कई सीटों पर सीमांकन बदलने से कई उम्मीदवारों ने अपनी सीट छोड़कर दूसरे सीट पर जा पहुंचे हैं। स्थानीय स्वराज के चुनाव में जिला या तहसील पंचायत के चुनाव में लोगों को अधिक रुचि नहीं है। सभी मुख्य राजनीति दलों का मुख्य ध्यान नगर पालिका के चुनाव पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की संख्या भी कम है, लेकिन नगर पालिका के चुनाव में इससे विपरीत स्थिति है। इस बार भाजपा या कांग्रेस दोनों में से किसी एक पार्टी को आणंद और बोरसद तहसील के 18 सीटों में से सर्वाधिक सीट मिलने पर वे सत्ता की चाबी संभालेंगे।
आणंद जिला पंचायत की तहसीलवार सीटों को देखे तो उमरेठ तहसील के भालेज, शीली, सुरेली, वणसोल सीट पर भाजपा, कांग्रेस समेत एनसीपी,आप और निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं। इस क्षेत्र की चार सीटों पर एक पार्टी आगे दिखाई देती है, परंतु दूसरी पार्टी भी कोई कसर छोडऩा नहीं चाहती है। इस वजह से यहा रस्साकशी देखी जा रही है। चीखोदरा, नापाड-वांटा, सारसा और वासद सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी का जंग छिड़ी है।
जिला पंचायत में सत्ता हासिल करने के लिए सबसे महत्व की बोरसद तहसील की नौ सीटों पर विशेष खींचतान है। इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के पुराने नेता मैदान में हैं। कुछ युवा चेहरा भी भाग्य आजमा रहे हैं। दहेवाण, दावोल, जंत्राल और कठाणासीट पर भाजपा और कांग्रेस के ताकतवर नेताओं के बीच सीधी लड़ाई है। निर्दलीय भी मैदान में है, लेकिन इसका कुछ विशेष असर नहीं देखा गया। खंभात तहसील की छह सीटों पर भी कमोबेश यही स्थिति है। यहां भी भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान मचा है। यह क्षेत्र आणंद जिला कांगे्रस समिति के प्रमुख महेन्द्रभाई का क्षेत्र होने की वजह से कांग्रेस ने इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है, अधिक सीटों के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। अपनी सीट बचाने के लिए खंभात विधायक समेत कई नेता अपनी ओर से जोर आजमाइश कर रहे हैं। पेटलाद तहसील की छह सीटों पर कांग्रेस के एक दिग्गज नेता समेत कई अन्य उम्मीदवार मैदान में हैं। इस क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य लड़ाई है। सोजित्रा और तारापुर तहसील में भाजपा विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा के नए बने जिला प्रमुख विपुल पटेल इसी क्षेत्र के हैं, जिससे उन्होंने पूरे क्षेत्र में अपनी टीम उतार दी है। तारापुर और सोजित्रा में से सीट झटकने के लिए ग्रामीण स्तर पर काम किया जा रहा है। आंकलाव तहसील की चार सीटों का गणित हालांकि सीधा बताया जा रहा है। यह क्षेत्र कांग्रेस के प्रमुख अमित चावडा का है। यहां चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है। दोनों दलों ने प्रचार की पुरानी रीति-नीति बदल कर सोशल मीडिया का सहारा लिया है। स्थानीय स्वराज के मतदान में अभी चंद दिन ही बाकी बचे हैं। जिला पंचायत की 42 सीटों पर 14 लाख से अधिक मतदाता किस मुद्दे पर मतदान करेंगे,इस पर सबकी नजर है।

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