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Gujarat Hindi News : पाकिस्तान से रिहा होकर वतन लौटे मछुआरे, परिजनों के आंखों में भर आए आंसू

मछली पकडऩे के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने पर पाकिस्तानी मरीन एजेंसी ने इन भारतीय मछुआरों को पकड़ा था। इन्हें गिरफ्तार कर पाक जेल में बंद किया गया। भारत सरकार के प्रयासों से 20 मछुआरों को पाकिस्तान ने पिछले दिनों रिहा किया था।

अहमदाबाद

Published: November 19, 2021 09:38:40 am

प्रभास पाटण. पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर 20 भारतीय मछुआरे गुरुवार को अपने वतन वेरावल पहुंचे। यहां पर परिजनों समेत ग्रामीणों ने उनका जमकर स्वागत किया। वेरावल के मत्स्योद्योग कार्यालय में इनके पहुंचते ही जश्न का माहौल हो गया। एक ओर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू थे तो दूसरी ओर उनके लौटने की खुशी में उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया गया।
मछली पकडऩे के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने पर पाकिस्तानी मरीन एजेंसी ने इन भारतीय मछुआरों को पकड़ा था। इन्हें गिरफ्तार कर पाक जेल में बंद किया गया। भारत सरकार के प्रयासों से 20 मछुआरों को पाकिस्तान ने पिछले दिनों रिहा किया था। वे सभी अमृतसर के वाघा -अटारी सीमा पर गत 13 नवंबर को पहुंचे थे। इसके बाद वे अमृतसर से ट्रेन के जरिए वडोदरा आए और फिर बस से वेरावल पहुंचे। अपने वतन लौटने पर उनके परिजनों समेत ग्रामीणों के बीच खुशी का माहौल देखा गया।
इससे पूर्व इन सभी मछुआरों का गिर सोमनाथ पुलिस ने जांच की। इसके बाद इन्हें वेरावल मत्स्योद्योग कार्यालय के प्रांगण में लाया गया।


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Gujarat Hindi News : पाकिस्तान से रिहा होकर वतन लौटे मछुआरे, परिजनों के आंखों में भर आए आंसू
Gujarat Hindi News : पाकिस्तान से रिहा होकर वतन लौटे मछुआरे, परिजनों के आंखों में भर आए आंसू580 भारतीय मछुआरे अभी भी पाक जेल में बंद

वेरावल मत्स्य उद्योग के अधीक्षक के एम सिकोतरिया ने बताया कि पाकिस्तान जेल में फिलहाल 600 भारतीय मछुआरे कैद हैं, इनमें से सिर्फ 20 को पाकिस्तान सरकार ने रिहा किया है। जबकि 580 मछुआरे अभी पाक के जेलों में बंद हैं। ये तीन से चार वर्ष पहले पकड़े गए थे। गुरुवार को वेरावल पहुंचे मछुआरों में से 19 गिर सोमनाथ जिले और एक पोरबंदर जिले का निवासी है। भारतीय मछुआरों के करीब 1148 बोट पाकिस्तान ने अपने कब्जे में रखा है। भारतीय मछुआरों के पाक जेलों में बंद होने पर भारत सरकार मछुआरों के परिवार की सहायता के लिए प्रति दिन के हिसाब से तीन सौ रुपए चुकाती है। यह राशि उनके छूटने तक सरकार देती है।
विदेश मंत्रालय से सम्पर्क के बाद मिला छुटकारा

नवाबंदर के मुक्त हुए बामणिया बाबू करसन ने बताया कि उन्हें पाकिस्तानी मरीन एजेंसी ने वर्ष 2017 में पकड़ा था। इसके बाद लंबे समय से उसका परिवार कई कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश था। आखिरकार विदेश मंत्रालय से सम्पर्क साधने के बाद उसे छोड़ा गया।
Gujarat Hindi News : पाकिस्तान से रिहा होकर वतन लौटे मछुआरे, परिजनों के आंखों में भर आए आंसूयह थी भूल

बाबूभाई निजामुद्दीन बोट-1 में काम करते थे। मार्च 2017 के दौरान पाकिस्तान मरीन सिक्युरिटी एजेंसी के गार्ड ने इस बोट के साथ सात लोगों को बंदी बनाया था। सजा पूर्ण होने पर इनमें से छह को वर्ष 2018 में छोड़ दिया गया, जबकि बाबूभाई को नहीं छोड़ा गया। बाबूभाई के पिता के नाम में भूल होने से यह समस्या पैदा हुई। जेल में भूल से पिता का नाम करसनभाई की जगह किशनभाई लिखा गया था। बाद में पिता के नाम सुधारने के बाद उसे छोड़ा गया।

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