अहमदाबाद में बने कृत्रिम पैर से माउंट एवरेस्ट फतह कर सकेगा छत्तीसगढ़ का युवक

-रेल दुर्घटना में दोनों पैर गंवाने के बाद भी युवक का पर्वतारोहण का शौक बरकरार

-अहमदाबाद स्पाइन इंस्टीट्यूट की ओर से विशेष पैर के बाद अब विशेष शॉक्स भी किए जा रहे हैं तैयार

By: Omprakash Sharma

Published: 17 Oct 2020, 08:34 PM IST

अहमदाबाद. चलती रेल में चढऩे के प्रयास में अपने दोनों पैर गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी एक युवक माउंट एवरेस्ट को फतह करने की ओर आगे बढ़ रहा है। दरअसल 28 वर्षीय यह युवक पहले से ही पर्वतारोहण का शौकीन है। दक्षिण अफ्रीका में पर्वतारोहण में सफल होने के बाद उसने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने का सपना संजोया था। इसके लिए वह कड़ा परिश्रम कर रहा है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल कैंपस में स्थित स्पाइन इंस्टीट्यूट की ओर उसे अनुकूल कृत्रिम पैर मुहैया कराए गए हैं। जिससे उसे पूरी उम्मीद है कि माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंच जाएगा।
छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी चित्रसेन शाहू हाउसिंग बोर्ड में अधिकारी हैं। उन्हें बचपन से ही पर्वतारोहण का शौक है। वर्ष 2014 में उनके साथ रेल दुर्घटना हुई और अपने दोनों पैर गंवा चुके थे। हालांकि उन्होंने अपने पर्वतारोहण के शौक से समझौता नहीं किया। वे अब भी पहले की तरह पर्वतारोहण कर रहे हैं। दुर्घटना में पैर गंवाने के बावजूद शाहू दक्षिण अफ्रीका स्थित किलिमांजरो पर्वत को कृत्रिम पैरों के बल पर फतेह कर चुके थे। हालांकि उस दौरन भारी वजन वाले कृत्रिम पैरों ने परेशानियों का सामना करना पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका में सफलता मिलने के बाद अब वे माउंट एवरेस्ट को फतेह करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें कम वजन वाले पेरालिम्बिक लेग्स की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देशों में विविध संस्थानों का संपर्क किया लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद उन्होंने ढाई वर्ष पूर्व अहमदाबाद के सिविल अस्पताल स्थित स्पाइन इंस्टीटूयूट का संपर्क किया, जहां उन्हें अनुकूल पैर तैयार करने का भरोसा दिलाया गया। पिछले दिनों उन्हें ये पैर उपलब्ध करा दिए गए और अब उन्हें उम्मीद है कि इन पैरों की मदद से वे 8848 मीटर की उंचाई पर पहुंच कर माउंट एवरेस्ट को फतेह कर सकेंगे।

पूरा कर सकेंगे सपना

चित्रसेन शाहू का कहना है कि अहमदाबाद में तैयार हुए पैरों से वे काफी संतुष्ट हैं। उन्हें उम्मीद है कि इन कृत्रिम पैरों के माध्यम से सपनों को पूरा किया जा सकेगा। ये पैर उन्हें निशुल्क प्रदान किए गए हैं जबकि इनकी कीमत लाखों रुपए हो सकती थी।

कार्बन फायबर युक्त पैरों की कीमत 20 लाख के आसपास
स्पाइन इंस्टीट्यूट ने ढाई वर्ष के अथक परिश्रम से कार्बन फायबर से ये पैर तैयार किए हैं। जिस तकनीक और धातू से पैर बनाए गए हैं उसके आधार पर इनकी लागत 15 से 20 लाख रुपए लागत आती लेकिन शाहू को पैर निशुल्क प्रदान किए गए हैं। किसी वस्तु के लेकर ऊंचाई पर चढऩा कठिन होता है। इससे कम से कम वजन होना जरूरी है। जिसे ध्यान में रखकर ये पैर स्टील डाई (मोल्ड) की मदद से तैयार किए गए हैं। वजन में हल्के होने के काण इनके साथ चढना आसान होगा।
डॉ. राजेश सोलंकी निदेशक , स्पाइन इंस्टीट्यूूट


चार गुना कम है पैरों का वजन, शॉक्स किए जाएंगे तैयार
शाहू ने जिन पैरों की बदौलत अफ्रीका में पर्वतारोहण किया था उसकी तुलना में इन कृत्रिम पैरों का वजन चार गुना कम है। अहमदाबाद में तैयार किए गए पैरों का वजन मात्र ढाई से तीन किलो है। पैर तैयार करने के बाद अब शाहू को ऐसे शॉक्स भी उपलब्ध करवाए जाएंगे जससे उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
धीरेन जोशी, इन्चार्ज ऑस्थोटिक एंड प्रोस्थेटिक कॉलेज अहमदाबाद

Omprakash Sharma Reporting
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