scriptAims to provide better services to patients in Asia's largest Hospital | एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर सेवाएं देने का लक्ष्य | Patrika News

एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर सेवाएं देने का लक्ष्य

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी , Dr. Rakesh Joshi

 

अहमदाबाद

Published: June 19, 2022 11:00:34 pm

अहमदाबाद. Asia's largest Hospital एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में न सिर्फ अहमदाबाद और गुजरात बल्कि अन्य कई राज्यों के मरीज उपचार के लिए आते हैं। प्रतिदिन लगभग तीन से साढ़े तीन हजार मरीजों की ओपीडी और प्रति वर्ष लगभग 50000 (पचास हजार) सर्जरी के आंकड़े से ही अस्पताल की कार्यप्रणाली का अनुमान लगाया जा सकता है। वैसे अस्पताल में बेहतर सुविधाएं पहले से ही हैं। फिर भी अधिक मरीजों की संख्या के कारण विलंब होना या फिर अन्य किसी परेशानी पर भी ध्यान रखकर अच्छे से अच्छा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पत्रिका से विशेष बातचीत में अस्पताल के Medical Superintendent Dr. Rakesh Joshi चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने यह बातें कहीं। अस्पताल में बाल सर्जरी के विभागाध्यक्ष के रूप में सेवा दे रहे डॉ. जोशी को चिकित्सा अधीक्षक के रूप में लगभग 10 माह का समय हो गया है। इससे पूर्व वे अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। पेश हैं इस बातचीत के कुछ अंश।
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सवाल::कोरोना महामारी से क्या सबक मिला?

जवाब:::जब कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी तब अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक के रूप में सेवा दे रहे थे। नया संक्रमण होने के कारण डर तो लगता था लेकिन मरीजों का दुख भी नहीं देखा जाता था। यही कारण था कि कोरोना की पहली लहर के दौरान लगभग दो माह तक होटल और अस्पताल में ही रहे। उनके साथ अन्य अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल भी रहे। लेकिन जैसे-जैसे कोरोना का प्रकोप कम हुआ वैसे-वैसे स्थितियां बदलती गईं। कोरोना ने न सिर्फ चिकित्सा कर्मियों बल्कि आम लोगों को भी बहुत कुछ सिखा दिया है।
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सवाल:::कोरोना महामारी के बीच चुनौतियों के बावजूद मरीजों की सुविधाओं के लिए क्या कुछ नया किया गया?

जबाव: सिविल अस्पताल में वेब पोर्टल तैयार किया गया। विशाल परिसर होने के कारण यहां मरीजों और परिजनों को सटीक चिकित्सक के पास पहुंचाने में मदद करता है। इसकी सफलता 90 फीसदी तक है। अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों को इससे महत्वपूर्ण लाभ मिल रहा है। कोरोना के साथ-साथ ओमिक्रॉन वायरस को लेकर इंतजाम करने पड़े। अस्पताल के कोरोना टीकाकरण केन्द्र में लगभग 55 हजार लोगों को वैक्सीन लगाई गई। गर्मी के मौसम में कैंपस में पानी की फेरी शुरू की गई। कामचलाऊ रेनबसेरा भी शुरू किया गया। हालांकि स्थायी रूप से अस्पताल कैंपस में रेन बसेरा तैयार हो रहा है। ऑक्सीजन प्लांट भी निर्मित किए गए। वार्ड में हर वक्त सर्वेन्ट की मौजूदगी निश्चित की गई है। अब वैलेट पार्किंग की निशुल्क सुविधा भी अस्पताल में उपलब्ध है, जो देश में संभवत: किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार की गई है। इस तरह के अनेक कार्य अस्पताल में किए गए हैं।
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सवाल:: आज अंगदान को लेकर सिविल अस्पताल के नाम बड़ी उपलब्धि है, यह सब कैसे संभव हो सका?

जवाब:: अस्पताल में सिर्फ चिकित्सा अधीक्षक ही नहीं सभी लोग आत्मसमर्पणता की भावना से काम करते हैं। नौ दस माह में ब्रेन डेड के रूप में 65 अंगदाता बने हैं। राज्य सरकार के सहयोग और अस्पताल के कर्मियों के अलावा ब्रेनडेड लोगों के परिजनों की भी इसमें बड़ी भूमिका है।
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सवाल::::अपने विभाग में कैसे समय दे पाते हैं।

जवाब::: पीडियाट्रिक सर्जन के तौर पर अब तक 18000 से अधिक ऑपरेशन किए हैं। अस्पताल आते ही ऑपरेशन थिएटर में जाकर ऑपरेशन करने के बाद चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय आना होता है। प्रतिदिन बच्चों के जटिल ऑपरेशन करने के कारण अस्पताल को विश्व स्तर पर भी जाना जाता है।
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सवाल:: बेहतर चिकित्सकों में आपकी गिनती है, फिर भी सरकारी अस्पताल में सेवा देना ही क्यों चुना?

जबाव :: यहां आने वाले मरीजों का जब सफल उपचार होता है और उसके बाद उनके चेहरे पर जो मुस्कान आती है वह बहुत आत्मसंतोष देती है। बस यही सोच है जो सिविल अस्पताल में रहने के लिए प्रेरित करती है।
एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर सेवाएं देने का लक्ष्य
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