वर्तमान कानूनी व्यवस्था से पूरी तरह अलग हो वैकल्पिक विवाद समाधान

Mukesh Sharma

Publish: Sep, 17 2017 10:26:26 PM (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
वर्तमान कानूनी व्यवस्था से पूरी तरह अलग हो वैकल्पिक विवाद समाधान

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को सफल बनाने के लिए इसे वर्तमान कानूनी व्यवस्था से पूरी तरह

अहमदाबाद।सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को सफल बनाने के लिए इसे वर्तमान कानूनी व्यवस्था से पूरी तरह अलग बनाना होगा। यूनाईटेड वल्र्ड स्कूल ऑफ लॉ में रविवार को एडीआर पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि वे एडीआर में उनका विश्वास नहीं है, लेकिन इसे एडीआर के प्रभावी रूप से अमलीकरण के लिए इसे वर्तमान न्याय प्रणाली से पूरी तरह अलग होना होगा।

इसे वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) कहा जाता है, इसका मतलब वर्तमान व्यवस्था में कुछ कमियां हैं इसलिए हमें इससे ज्यादा कुछ अलग करने की जरूरत है।एडीआर पर बल देते हुए उन्होने कहा कि इस देश में कानून संबंधी प्रक्रिया में देरी के चलते मुकदमा दशकों तक चलता है। प्रत्येक कानून ने अधिकार व दायित्व बनाए तथा हर अधिकार व दायित्व की वजह से संघर्ष पैदा होता है।

 

अधिकारों व दायित्वों की संख्या को लोगों के पक्ष में बनाए गए अधिकारों व दायित्वों की संख्या से गुणा करने के कारण बनाए गए सभी कानून में कई विवादों की संभावना है। ज्यादा संख्या में लंबित मामले वाले भारत जैसे देश में एडीआर भी जरूरत है जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

डेढ़ वर्ष में साढ़े चार लाख अदालती मामलों में कमी

इस अवसर पर गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी ने कहा कि राज्य में पिछले डेढ़ वर्ष में साढ़े 4 लाख केसों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2016 में पदभार संभालने के वक्त राज्य में 21.40 लाख मामले थे।

 

इसमें 3 लाख नशाबंदी से जुड़े थे, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के मामलों की संख्या 3 लाख थी, दुर्घटना के साढ़े तीन लाख मामले तथा सिविल विवाद के एक से डेढ़ लाख मामले थे। तब से अब तक साढ़े चार लाख मामलों में कमी आई। गत 9 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से 90 हजार मामलों का निपटारा किया गया। इस अवसर पर गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम. आर. शाह व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

 

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