scriptAmazing elements of the solar system, interesting journey of asteroids | World Asteroid Day सौरमंडल के अद्भुत तत्व क्षुद्र ग्रहों का रोचक और खतरनाक सफर | Patrika News

World Asteroid Day सौरमंडल के अद्भुत तत्व क्षुद्र ग्रहों का रोचक और खतरनाक सफर

  • आज विश्व क्षुद्र ग्रह दिवस
  • तुंगुस्का इवेन्ट ने सर्वप्रथम दी थी उल्कापिंडों के दुष्प्रभाव की जानकारी
  • रशियन खनिजशास्त्री लियोनिड अलेकसेविच कुलिक ने किया था शोध

 

अहमदाबाद

Published: June 30, 2022 12:10:08 am

राजकोट. भारत के ऋषि-मुनियों और साधकों ने अपने जीवन पर्यंत कठिन तप के परिणामस्वरूप विभिन्न शास्त्रों और ग्रंथों की रचना की है। इन विभिन्न ग्रंथों में से एक खगोलशास्त्र है जिसमें आकाश में गतिशील तारों ग्रहों और सौरमंडल के संबंध में रोचक जानकारी आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ में दी।
खगोल विज्ञान भारत की प्राचीन संस्कृति का विशिष्ट आयाम है। उल्कापिंड यानी क्षुद्र ग्रह भी इसमें एक भाग है। भूवैज्ञानिकों की ओर से दिए गए सबूतों के अनुसार करीब 65 मिलियन साल पहले पृथ्वी पर डयनासोर समेत उस समय अस्तित्व में रहे करीब तीन चौथाई प्राजातियां लुप्त हो चुकी है। इसके कई कारणों में एक उल्कापिंड भी थे। इनके विनाशक असर से एक विशाल विस्फोट और गड्ढें हुए। विस्फोट से वातावरण में मलबा फैल गया, जिसके कारण वातावरण में जबर्दस्त बदलाव आया, यह बाद मेें विनाशक साबित हुआ।
World Asteroid Day सौरमंडल के अद्भुत तत्व क्षुद्र ग्रहों का रोचक और खतरनाक सफर
World Asteroid Day सौरमंडल के अद्भुत तत्व क्षुद्र ग्रहों का रोचक और खतरनाक सफर
टकराने की आशंका
जानकारी के अनुसार इस तरह के कई उल्कापिंड बाद में खगोल शास्त्र में पहचाने गए।
इनकी भ्रमणकक्षा (कक्ष) आंतरिक सौरमंडल से गुजरती है और पृथ्वी की भ्रमण कक्षा को पार करती है। खगोलशास्त्री के अनुसार इसमें से कई भविष्य में पृथ्वी से टकराएंगी। रूस के भूवैज्ञानिक लियोनिड एलेकसेविच कुलिक ने सबसे पहले इस विनाशकारी घटना की खोज की थी। उनके अनुसार 30 जून 1908 को रूस के साइबेरिया प्रदेश में तुंगस्का नदी के पास सबसे पहले उल्कापिंड जमीन से एकदम समीप आया और विस्फोट हुआ। इसके कारण 2100 वर्ग किलोमीटर जंगल नष्ट हो गया।
World Asteroid Day सौरमंडल के अद्भुत तत्व क्षुद्र ग्रहों का रोचक और खतरनाक सफरइसके बाद से वैज्ञानिक और खगोलविदों ने छोटे ग्रहों के बारे में शोध करने में रुचि दिखानी शुरू की और कई नई जानकारियां भी प्राप्त हुईं। यूएन ने दिसंबर 2016 में 30 जून को अंतरराष्ट्रीय लघुग्रह दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। जिससे कि लोगों में इस उल्कापिंडों के बारे में जागरूकता पैदा हो सके। इस विषय पर अमेरिकी अंतरिक्ष शोध संस्था निओ स्टडीज सेंटर की ओर से लगभग 16 हजार पदार्थों की सूची बनाई गई है। इसे नीयर अर्थ आब्जेक्ट जैसे आकाशीय पदार्थ के रूप में उल्का, लघु ग्रह, धूमकेतू आदि कहा जाता है जो कि पृथ्वी के लिए खतरा बने हुए हैं।
पृथ्वी के समीप आने से कई तरह के दुष्प्रभाव, हो रहा शोध कार्य
एक उल्कापिंड के टकराने से होने वाले अलग-अलग असर में गति, ऊर्जा, आघात तरंग, टकराने का कोण आदि महत्व का होता है। पृथ्वी पर मिले उल्कापिंडों के अवशेषों से हम इनके बारे में जानकारी ले सकते हैं। ज्यादातर लघुग्रह चट्टान की तरह होते हैं।
इससे हमारे वातावरण में विघटना की आशंका रहती है। कई लघु ग्रह धातु के बने होते हैं। इन लघुग्रहों का धनत्व अधिक होता है, साथ ही साथ इनकेे वातावरण से गुजरने वक्त पृथ्वी की सतह तक पहुंचने की अधिक आशंका रहती है। टक्कर के वक्त इनसे अधिक ऊर्जा के निकलने से यह अत्यधिक विनाशकारी होते हैं। पृथ्वी का दो तिहाई भाग समुद्र से ढका है। अभी पृथ्वी का बहुत बड़ा हिस्सा आबादीविहीन है। यदि लघु ग्रह पृथ्वी से टकराते हैं तो इनके आकार, गति और अन्य परिबलों के कारण विनाशकारी तरंग तो आएंगीं, जिससे पृथ्वी के वातावरण में धूल कण आदि से जीवसृष्टि को नुकसान होना संभव है। कोई बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी के किसी भी हिस्से से टकराए, तो विश्व का विनाश निश्चित है। यदि वह समुद्र से टकराए तो इसकी बड़ी हलचल बड़े पैमाने पर तबाही ला सकती है। युनाइटेड नेशन्स ऑफिस फोर आउटर स्पेस अफेयर्स कई वर्षों से एनईओ पर काम कर रहा है। इसका मानना है कि एनईओ के स्वरूप में अपने ग्रह पर एक खतरा है। इससे सामना करने के लिए वैश्विक सहयोग की जरूरत है। एनईओ के खतरे को टालने के लिए 2014 में इंटरनेशनल एस्ट्रॉएड वार्निंग नेटवर्क और स्पेस मिशन प्लानिंग एडवाइजरी ग्रुप की स्थापना की गई है। इसमें विभिन्न देशों की अंतरिक्ष संस्थाओं के बीच समन्वय का काम किया जाता है। क्षुद्र ग्रहों के टकराने की जानकारी टोरीनो स्केल से मिलती है। इसमेें पदार्थ का आकार और पृथ्वी के साथ टकराने की संभावना के आधार पर विनाशक होने के संबंध में टिप्पणी की जाती है। टोरीनो स्केल पर लेवल 4 पर पहुंच चुका अपोफिस के संंबंध में ऐसा प्रतीत होता है कि यह वर्ष 2029 तक पृथ्वी के साथ टकराएगा। यह जब 2021 में पृथ्वी के समीप से गुजरा तब से इसे व्हाइट जोन में रखा गया है।

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