निजी स्कूल छोड़ सरकारी हिंदी स्कूलों में २३७ विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

AMC, School board, Govt school, Pvt school, admission, Covid 19, Gujarat कोरोना काल में निजी स्कूल से किनारा, सरकारी लगा प्यारा

By: nagendra singh rathore

Published: 15 Sep 2020, 05:21 PM IST

नगेन्द्र सिंह/पुष्पेन्द्र सिंह राजपूत

अहमदाबाद. कोरोना वायरस के संक्रमण ने न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य बल्कि उनकी शिक्षा और रहन सहन पर भी भारी प्रभाव डाला है। कोरोना काल में नौकरी जाने, वेतन घटने, धंधा मंदा होने से लोग निजी स्कूलों से किनारा करने लगे हैं। अब उन्हें सरकारी स्कूल भी प्यारा लगने लगा है। इसके चलते हिंदी माध्यम की स्कूलों की भी पूछ बढ़ी है।
इसका खुलासा इस वर्ष २०२०-२१ में अहमदाबाद महानगर पालिका (मनपा) संचालित ३७० सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या से हुआ है। मनपा संचालित ३७० स्कूलों में निजी स्कूलों को छोड़ २१०६ विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
हिंदी माध्यम की स्कूलों की बात करें तो मनपा संचालित हिंदी माध्यम की ६० स्कूलों में निजी स्कूलों को छोड़ २३७ विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। सबसे ज्यादा ६२ विद्यार्थियों ने कक्षा तीन में प्रवेश लिया है। जबकि कक्षा दो में ४२ विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को छोड़ प्रवेश लिया है। कक्षा दो से पांचवीं तक में १७३ विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को अलविदा कहकर निजी स्कूलों में प्रवेश लिया है। उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं छह से आठवीं में ६४ विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी में प्रवेश लिया है।
अंग्रेजी माध्यम की ३३ स्कूलों में १६५ जबकि गुजराती माध्यम की २३२ स्कूलों में १६२६ विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों को छोड़ कर प्रवेश लिया है। इस लिहाज से देखें तो हिंदी माध्यम की स्कूलों में गुजराती के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या रही जहां निजी स्कूल के बच्चों ने प्रवेश लिया है।

मनपा स्कूलों में २० हजार ने लिया प्रवेश
अहमदाबाद की मनपा स्कूलों में वर्ष २०२०-२१ में २० हजार ९२७ विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। जिसमें से १५३७७ विद्यार्थियों ने पहली कक्षा में प्रवेश पाया है। इसके चलते मनपा संचालित ३७० स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक में विद्यार्थियों की संख्या एक लाख २३ हजार १६६ हो गई है।


हररोज से आठ से दस अभिभावक आते हैं
अहमदाबाद के बापूनगर की एक मनपा स्कूल के शिक्षक ने बताया कि हर रोज औसतन आठ से दस अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने आ रहे हैं। ज्यादातर कहते हैं सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ी हैं। कोरोना से नोकरी चली गई आय कम हुई है ऐसे में निजी स्कूलों की भारी भरकम फीस भरने की जगह सरकारी स्कूल की बेहतर शिक्षा का क्यों न फायदा लिया जाए।

क्या कहते हैं अभिभावक
अभिभावक विजय राजपूत का कहना है कि उनकी बच्ची अंग्रेजी प्राइवेट स्कूल में पढ़ती हैं, लेकिन लॉकडाउन में स्कूलें बंद रही फिर भी फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। हर वर्ष 25 से 30 हजार रुपए बच्ची की फीस हो जाती है। इस बार भी प्रवेश के लिए छहमाह तक की फीस मांगी जा रही है। इसके चलते अब वे बच्ची का दाखिला सरकारी स्कूल में कराना चाहते हैं। वहां फीस भी नहीं है और सुविधाओं में भी वृद्धि हुई है।

कोरोना के साथ सुविधाओं का भी है असर
अहमदाबाद महानगरपालिका स्कूल बोर्ड के चेयरमैन धीरेन्द्रसिंह तोमर ने बताया कि कोरोना के चलते नौकरी जाने, आय कम होने की वजह के साथ बीते कुछ सालों में सरकारी स्कूल में सुविधाओं में काफी इजाफा हुआ है। फीस नहिवत है और स्कूल ड्रेस, किताबें भी फ्री हैं। मध्यान्ह भोजन दिया जाता है। स्वास्थ्य जांच भी होती है। घर से स्कूल तक आने का किराया भी दिया जाता है। ऐसे में लोगों का विश्वास लौट रहा है। कोरोना के बीच निजी स्कूलों की फीस अब लोगों को भरना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में प्रवेश के लिए हर रोज अभिभावक आ रहे हैं। ज्यादातर ऐसे हैं जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं।

निजी स्कूल छोड़ सरकारी हिंदी स्कूलों में २३७ विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
nagendra singh rathore
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned