कोरोना की दूसरी लहर में अस्थमा मरीजों को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत

अस्थमा और कोरोना के एक ही तरह के लक्षण

आज विश्व अस्थमा डे पर विशेष

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 04 May 2021, 10:48 PM IST

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. कोरोना की दूसरी लहर में अस्थमा के मरीजों को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना और अस्थमा के लक्षण एक ही हैं। कोरोना फेफड़े में खराबी पैदा करता है। सीने में बलगम आना, खांसी आना, सांस चढऩा आदि अस्थमा और कोरोना के ज्यादा होने के भी यही लक्षण हैं। इस तरह के लक्षण आने पर यह नहीं समझना चाहिए कि यह अस्थमा से जुड़े लक्षण हैं, ऐसे में संबंधित व्यक्ति को कोरोना के जांच जरूर करवाना चाहिए।
चिकित्सकों के अनुसार अस्थमा के मरीजों की रोग प्रतिरोधक अपेक्षाकृत कम होती है। अस्थमा के मरीजों को कोरोना होने की संभावना ज्यादा है क्योंकि उनका फेफड़ा आम लोगों के मुकाबले थोड़ा नाजुक होता है। अस्थमा के मरीजों को कोरोनाकाल में अपनी दवा, इन्हेल स्टेरॉयड नियमित तौर पर लेनी चाहिए। सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह पर दवा लेनी चाहिए। कोरोना मरीजों को अतिरिक्त ध्यान भी रखना चाहिए।
गुजरात में फेफड़ों से संबंधित रोगों के विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र रावल ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में वायरस का म्यूटेशन ज्यादा मजबूत है। यह मुंह और गले के बजाए सीधे तौर पर फेफड़े में पहुंचता है। ऐसा होने पर तीसरे-चौथे दिन सीटी स्कैन करवाने पर नुकसान के बारे में पता चल सकता है। कोरोना की दूसरी लहर का यह वायरस काफी सक्षम है। इसलिए यह फेफड़े को ज्यादा बिगाड़ता है।

अस्थमा में फेफड़े की नली और सिकुड़ जाती हैं और इनमें सूजन आती है। इस कारण मरीज को खांसी आती है। सांस लेने में परेशानी ज्यादाहोती है, सीने में जकडऩ होती है। कोरोना मरीज के लिए नियमित दवा लेने के बाद सामान्य जीवन जीना संभव है। व्यायाम कर सकते हैं वहीं दैनिक काम-काज कर सकते हैं।


अस्थमा के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें

कोरोना के इस दौर में यदि अस्थमा का कोई लक्षण आता है तो उसे यह नहीं मान कर चलना चाहिए कि यह अस्थमा से जुड़े लक्षण हो सकते हैं। संबंधित व्यक्ति को तुरंत कोविड जांच करा लेनी चाहिए ।

डॉ प्रवीण गर्ग, सीनियर फिजीशियन, अहमदाबाद


नियमित दवाई लें अस्थमा मरीज

वैसे तो अस्थमा के ज्यादातर लक्षण कोरोना के जैसे ही हैं लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनसे पता लगाया जा सकता है। अस्थमा के दौरान खांस, सीने के भाग में कफ जमा होना जैसे लक्षण कोरोना में भी हो सकता हैं। अस्थमा से यदि ये शिकायतें हों तो मरीज को बुखार नहीं आता है। जबकि कोरोना के दौरान बुखार बना रहता है। अस्थमा के मरीजों में आम लोगों की तरह ही कोविड का संक्रमण लगने की आशंका होती है। लेकिन संक्रमण लगने के बाद अस्थमा मरीज की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए अस्थमा मरीजों को नियमित दवाइयां लेनी चाहिए।

डॉ. अवकाश पटेल, पल्मोलॉजिस्ट, अहमदाबाद


5 मई को मनाया जाता है दिवस

अस्थमा, इसकी दवाई और जटिलताओं के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन 5 मई को वल्र्ड अस्थमा डे मनाता है। ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) ने इस वर्ष की थीम 'अस्थमा की भ्रांतियों को उजागर करना' रखी है।

Rajesh Bhatnagar
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