उत्तर भारतीयों पर हमला: 22 आरोपियों को सशर्त जमानत, इलाके में नहीं करना होगा प्रवेश

-15-15 हजार के निजी मुचलके व बांड पर रिहा करने का आदेश

By: Uday Kumar Patel

Published: 12 Oct 2018, 09:47 PM IST

 

अहमदाबाद. शहर सत्र अदालत ने उत्तर भारतीयों पर हमले के आरोप में गिरफ्तार 22 आरोपियों को सशर्त जमानत दी है। इन आरोपियों को 15-15 हजार के निजी मुचलके व बांड पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
अदालत की शर्तों के तहत आरोपपत्र पेश नहीं किए जाने तक आरोपियों को थाने में हाजिरी के सिवाय संबंधित थाना क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना होगा। आरोपियों को मुकदमे के दौरान नियमित रूप से उपस्थित होना होगा। आरोपियों को धमकी या लालच नहीं देना होगा। अदालत से पूर्व मंजूरी के बिना देश नहीं छोडऩा होगा। सात दिनों के भीतर पासपोर्ट जमा कराना होगा। आरोपपत्र नहीं होने तक प्रत्येक महीने की पहली और पंद्रहवीं तारीख को संबंधित थाने मे हाजिरी देनी होगी।

जमानत पाने वाल आरोपियों में रवि उर्फ भटियो कांति ठाकोर, जशीबेन ठाकोर, सागर उर्फ विजय ठाकोर, दिव्या उर्फ मुन्नी ठाकोर, वीणीबेन राजेश ठाकोर, हंसाबेन परबत ठाकोर, प्रवीण ठाकोर, कमलेश उर्फ पिन्टू ठाकोर, भावेश ठाकोर, दीपक ठाकोर, विजय झाला, राजेश ठाकोर, प्रकाश उर्फ साजन मद्रासी, अरुण दंताणी, भरतजी ठाकोर, मुकेश राठौड़, बाबूजी राठौड़, जयदेव ठाकोर, प्रवीण ठाकोर, अल्केश ठाकोर, गोविंद ठाकोर व शोभाबेन ठाकोर शामिल हैं। ये सभी आरोपी साबरमती निवासी हैं। साबरमती रिवर फ्रंट पश्चिम थाने ने इन आरोपियों को गत 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था।
इन सभी को बाद में अदालत में पेश किया गया। अदालत ने इन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद आरोपियों ने जमानत याचिका दायर की।
आरोपियों की ओर से यह दलील दी गई कि इस संबंध में देरी से प्राथमिकी दर्ज की गई। स्थानीय होने के कारण आरोपियों के फरार होने की आशंका नहीं है। आरोपियों ने जमानत की शर्तों के पालन का आश्वासन दिया है।

भय के माहौल में उत्तर भारतीयों का पलायन : राज्य सरकार

उधर राज्य सरकार की ओर से आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया गया। यह दलील दी गई कि आरोपियों ने गैरकानूनी रूप से एक समूह बनाकर घातक हथियारों के साथ गुजरात में रहने वाले उत्तर भारतीयों को भगाने के उद्देश्य से मारा। आरोपियों से लोहे के पाइप जप्त किए गए हैं। आरोपियों की सक्रिय भूमिका है। यह हिंसा की सामान्य घटना नहीं है। उत्तर भारतीयों में भय के माहौल के बाद उत्तर भारतीय लोगों को पलायन करना पड़ा। यह कानून-व्यवस्था बिगाडऩे का षडयंत्र है। इससे समाज में गहरा प्रभाव पड़ा है। इस कृत्य का पूरे देश पर असर पड़ा है। इस मामले में फिलहाल जांच जारी है। इसलिए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। आरोपी को जमानत पर रिहा करने से ऐसे अपराध की फिर से आशंका है। इसलिए इस मामले में जब तक आरोपपत्र पेश नहीं होने तक जमानत नहीं देनी चाहिए।

Uday Kumar Patel Reporting
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