शिक्षक दिवस पर विशेष: इस शिक्षिका के अभियान से जंक फूड छोड़ मध्याह्न भोजन खाने लगे बच्चे, मिला श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान

Best teacher award 2020, Gujarat, Dakshaben Parmar, Ahmedabad, Education, शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर ध्यान देती हैं शिक्षिका दक्षाबेन, अशिक्षित माता-पिता के सपने को किया साकार, सरकार से पहले गांववालों ने किया सम्मान

By: nagendra singh rathore

Updated: 05 Sep 2020, 09:58 PM IST

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. सरकारी स्कूल में पढऩे आने वाले बच्चों की शिक्षा ही नहीं उनके स्वास्थ्य और उनकी स्कॉलरशिप के लिए प्रयासरत रहने वालीं शिक्षिका दक्षाबेन मनूभाई परमार को गुजरात सरकार की ओर से वर्ष 2020 के श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
अहमदाबाद जिले के विंझोल गुजराती शाला नंबर 2 की शिक्षिका दक्षाबेन परमार को बीते वर्ष 2019 में ही जिला स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार मिल चुका है। 15 सालों से शिक्षक के रूप में कार्यरत दक्षाबेन की विशेषता है कि वे सरकारी स्कूल के बच्चों को सरकार की ओर से दी गई प्रोजेक्टर, कंप्यूटर सुविधा की मदद से तकनीक का सहारा लेकर पढ़ाती हैं। उनकी ओर से छेड़े गए अभियान और जागरुकता के चलते बच्चे अब जंक फूड छोड़ स्कूल का मध्याह्न भोजन ही खाते हैं। बच्चों ने जंक फूड से तौबा कर ली है।
राज्य स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होने पर वे कहती हैं कि वे खुश हैं कि वे अपने पिता मनूभाई परमार का सपना पूरा कर पाई हैं। उनके पिता अशिक्षित हैं, लेकिन कहते हैें कि तुम बड़े होकर सबको पढ़ाना और नाम कमाना।

तीन वर्ष में 15 बच्चे एनएमएमएस में सफल

वे बच्चों को यूट्यूब व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अलग-अलग संदर्भों और जटिल विषयों की जानकारी देती हैं। मेधावी बच्चों को नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप (एनएमएमएस) परीक्षा के लिए भी तैयार करती हैं, ताकि उन्हें लगातार चार साल 9-12 कक्षा तक प्रति महीने एक हजार की स्कॉलरशिप मिलती रहे। उनके प्रयासों की बदौलत 2020 में तीन, 2019 में नौ और 2018 में तीन विद्यार्थियों को एनएमएमएस छात्रवृत्ति मिली है।

प्रोजेक्ट, नाटक से समझाती हैं जटिल विषय

दक्षाबेन की खासियत है कि वे बच्चों को प्रोजेक्ट तैयार करके, नाटक, कलेक्शन करवाकर और अलग अलग जगहों की मुलाकात करवाकर विषय को पढ़ाती और समझाती हैं, जिससे बच्चे आसानी से सीख और समझ जाते हैं। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं।

कोरोना वॉयिरस के रूप में दी ड्यूटी

वे कोरोना वॉरियर के रूप में भी वे दो महीने तक शहर के सबसे प्रभावित दाणीलीमड़ा इलाके में ड्यूटी दे चुकी हैं। चुनावों में महिला संचालित मतदान केन्द्र में पीठासीन अधिकारी का दायित्व भी निभा चुकी हैं। यही वजह है कि सरकार ने उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक के राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना है। सरकार की ओर से पुरस्कार देने की घोषणा करने के बाद विंजोल गांव के लोगों ने उनका सम्मान कर दिया।

निजी स्कूलों के बच्चों ने कराया सरकारी में नामांकन

दक्षाबेन बताती हैं कि वे स्कूली बच्चों विशेषकर गरीब बच्चों को समय निकालकर स्कूल में ही पढ़ाती हैं। गांव व आसपास के दाताओं की मदद से गरीब बच्चों को यूनिफॉर्म, स्टेशनरी भी दिलवाती हैं। इतना ही नहीं जो बच्चे पहले निजी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन माता पिता की आय कम होने पर फीस नहीं भर पाते। ऐसे बच्चों की फीस दाताओं से दान लेकर भरवाती हैं और शिक्षा ना बिगड़े इसलिए अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाने को प्रेरित करती हैं। इस वर्ष ही 30 बच्चे प्राइवेट स्कूल छोड़ उनके स्कूल में दाखिल हुए हैं। इसमें कई बच्चे स्कूल में बढ़ीं सुविधाओं और शिक्षा का स्तर बेहतर होने के चलते भी आए हैं।

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