Ahmedabad : नौ दिनों में ब्रेन डेड के अंगों से 10 को मिला जीवन

सिविल में दो और केडी अस्पताल से एक मरीज के अंगों को दान में देने की मिली थी सहमति

सोटो की वजह से बढ़ी रफ्तार

By: Omprakash Sharma

Published: 09 Jan 2021, 09:06 PM IST

अहमदाबाद. शहर में इस वर्ष के नौ दिनों में ब्रेन डेड हुए एक किशोर समेत तीन जन के अंगों के ट्रान्सप्लान्ट से दूसरे 10 लोगों को नया जीवन मिल सका है। शहर में स्टेट ऑर्गन टिश्यु ट्रान्सप्लान्ट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के तहत यह रफ्तार बढ़ी है। शनिवार को अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित किए गए 15 वर्षीय किशोर के हार्ट, दो किडनी, फेफड़े, लीवर और आंख से छह मरीजों का जीवन संभल गया। इससे पहले आठ दिनों में दो मरीजों (ब्रेन डेड) के अंगों से भी चार को जीवन मिला।
अहमदाबाद निवासी 15 वर्ष का एक किशोर पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटो पेनिया पुरपुरा (आटीपी) से पीडि़त था। इससे किशोर का मस्तिष्क बुरी तरह से डेमेज हो गया था। इस किशोर का उपचार शहर के केडी (निजी अस्पताल) में चल रहा था। चिकित्सकों के काफी प्रयास के बावजूद किशोर की स्थिति सुधर नहीं सकी। टेस्ट करने पर पाया गया कि वह ब्रेन डेड हो चुका है। बताया गया है कि यह बालक इकलौता पुत्र था। ब्रेन डेड होने से माता-पिता व अन्य परिजनों पर यूं तो दुखों का पहाड़ टूट चुका था लेकिन जब उन्हें समझाया गया तो वे अपने बच्चे के अंग दान के लिए राजी हो गए। जिसके कारण एक दो नहीं बल्कि छह लोगों को नया जीवन मिल सका है। इससे पहले सिविल अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित किए गए दो व्यक्तियों के अंग दान की उनके परिजनों ने सहमति दी थी। इनमें से एक के लीवर और दूसरे केे किडनी, लीवर और आंख दान की गईं थीं।

हृदय और लीवर का सिम्स में ट्रान्सप्लान्ट
इस किशोर के हृदय और लीवर को शहर के सिम्स अस्पताल में ट्रान्सप्लान्ट किया गया। जिससे दो मरीजों को नई जिन्दगी मिली है। सिम्स अस्पताल के मुख्य हार्ट ट्रन्सप्लान्ट सर्जन डॉ. धीरेन शाह ने बताया कि सिम्स अस्पताल में अब इस किशोर के हृदय के साथ ही यह 13वां ट्रान्सप्लान्ट है। गुजरात में सिम्स अस्पताल में ही इस तरह के ट्रान्सप्लान्ट किए जाते हैं। वर्ष 2021 का यह पहला ट्रान्सप्लान्ट है। सिम्म अस्पताल में डॉ. आनंद खक्कर ने इस किशोर के लीवर को मरीज में ट्रान्सप्लान्ट किया।
इसके अलावा दो किडनी का ट्रान्सप्लान्ट शहर के सिविल अस्पताल परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में किया गया है। फेफड़ों को वायु मार्ग से हैदराबाद ले जाया गया जहां मरीज को ट्रान्सप्लान्ट भी कर दिए गए। इसके अलावा बच्चे के कोर्निया भी दान में किए गए हैं। आईकेडीआरसी के निदेशक डॉ. विनीत मिश्रा ने बताया कि गुजरात में अंगदान की प्रक्रिया को लेकर जागरुकता बढ़ रही है।

वर्ष 2021 की शुरुआत से अच्छे संकेत
वर्ष 2021 की शुरुआत से ही जिस तरह से सोटो प्रक्रिया के अन्तर्गत ब्रेन डेड मरीजों के अंगों से लोगों के जीवन बचाने की कवायद बढ़ी है वह अच्छे संकेत है। सोटो प्रक्रिया से इसकी रफ्तार बढ़ी है। सिविल अस्पताल में पिछले आठ दिनों में दो मरीजों को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिजनों ने सहमति दी थी। जिससे जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सका है। हालांकि इसमें और भी जागरूकता की जरूरत है।
डॉ. जयप्रकाश मोदी, चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल अहमदाबाद

Omprakash Sharma Reporting
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