जापान की तर्ज पर बनेंगे Bullet train depot

जापान की तर्ज पर बनेंगे Bullet train depot
जापान की तर्ज पर बनेंगे Bullet train depot

Pushpendra Rajput | Publish: Oct, 06 2019 10:04:41 PM (IST) Ahmedabad, Ahmedabad, Gujarat, India

#Mumabitoahmedabad, #Sabarmatidepot, #Bullettrain, japan, NHRCL, Sabarmati station, Indian railway

अहमदाबाद. मुंबई से अहमदाबाद (mubai to ahmedabad) के बीच बुलेट ट्रेन (bullet train) के लिए जापान (japan) की तर्ज पर तीन रखरखाव (मेटेनेन्स) डिपो बनाया जाएगा। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ( national high speed rail corporation limited-एनएचआरसीएल) यह डिपो गुजरात के साबरमती, सूरत और मुंबई के थाणे में निर्मित करेगा जो जापान के सेन्डाई और कानाजावा डिपो की तर्ज पर डिजाइन किए जाएंगे। ट्रेन निरीक्षण उपकरण (Train inspection equipment) इस तरीके से डिजाइन किए जाएंगे, जिससे हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाने में सुरक्षित और आरामदायक हों। ये ग्रीन डिपो (Green depot) होंगे, जहां पानी का पर्याप्त संग्रह होगा।

यह भी पढ़ें: अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन....

एनएचएसआरसीएल की प्रवक्ता सुषमा गौर के मुताबिक साबरमती डिपो सबसे बड़ा डिपो होगा। यह मुख्य डिपो होगा, जो 80 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगा। यह ऐसा डिपो होगा, जो आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होगा ताकि नियमित तरीके से बुलेट ट्रेनों का रखरखाव हो सके। यहां पर इंस्पेक्शन बे, वॉशिंग प्लान्ट, वर्कशॉप, शेड्स, स्टेबलिंग लाइन्स इत्यादि की व्यवस्था होगी। इस डिपो में अहमदाबाद-मुंबई लाइन के लिए ऑपरेशन कंट्रोल सेन्टर भी होगा। वहीं थाणे डिपो साठ हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा, जहां ट्रेनों की रखरखाव की साबरमती डिपो जैसी ही सुविधाएं होंगे। इसके अलावा सूरत में 60 हेक्टेयर क्षेत्र में फंक्शन डिपो बनेगा, जिसमें जापान से आने वाली ट्रेनें रखी जाएंगी और ट्रेनों के रखरखाव की मूलभूत सुविधाएं होंगे। ये डिपो जापान में सेन्डाई और कानाजावा डिपो की तर्ज पर बनेंगे।

डिपो ऐसे बनेगा, जिसमें बारिश के पानी का संग्रह होगा और ट्रीटमेन्ट प्लान्ट (Treatment plant) के जरिए पानी शुद्ध किया जा सकेगा। यह ट्रीटमेन्ट प्लांट डिपो में बनाया जाएगा। पानी रिचार्ज करने के लिए रिचार्ज पिट्स भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा सूरत (Surat) और थाणे (Thane) डिपो में रिसाइक्लिंग और सिवरेज वॉटर की सुविधा भी होगी। वहीं बायो वेस्ट के अलावा हाईस्पीड ट्रेनों से निकलने वाले वेस्ट को ट्रेनों में एकत्रित किया जाएगा और बाद में सिवेज ट्रीटमेन्ट प्लांट्स के जरिए डिपो में उसे ट्रीट किया जाएगा।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned