बुलेट ट्रेन के लिए बनेगी 350 मीटर लम्बी पहाड़ी सुरंग....???

bullet train project, tunnel, national high speed corporation, Gujarat : भरूच से वापी के बीच 4 स्टेशनों और डिपो की डिजाइन और निर्माण के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर

By: Pushpendra Rajput

Updated: 27 Nov 2020, 07:34 PM IST

गांधीनगर. अहमदाबाद से मुंबई के बीच बनने वाले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को गति मिल गई है। गुजरात के वापी, बिलीमोरा, सूरत और भरूच स्टेशनों और डिपो सहित 47 फीसदी मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल (एमएएचएसआर) संरेखण की डिजाइन और निर्माण के लिए नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचआरसीएल) ने देश के सबसे बड़े बुनियादी ढांचे के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस अनुबंध में वापी, बिलिमोरा, सूरत एवं भरूच समेत चार स्टेशन, सूरत डिपो, 14 नदी क्रॉसिंग, 42 सड़क क्रॉसिंग और 6 रेलवे क्रॉसिंग बनेंगे। वहीं 350 मीटर लंबी पहाड़ी सुरंग भी बनाई जाएगी।
मुंबई - अहमदाबाद (508 किलोमीटर लंबे ) हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के वापी (महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर पर जारोली गांव) तथा गुजरात राज्य में वडोदरा के बीच 237 किमी लंबे वायाडक्ट (खंभों पर ट्रेक) के डिजाइन और निर्माण के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर भारत में जापान के राजदूत सतोषी सुजुकी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष रेलवे बोर्ड वी.के. यादव, प्रबंध निदेशक अचल खरे, प्रो. अशोक कुमार चावला तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने दिल्ली में एनएचएसआरसीएल के कॉर्पोरेट कार्यालय में आयोजित अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में भाग लिया।
23 सितम्बर को खोली गई तकनीकी बोली
इस निविदा के लिए तकनीकी बोली 23 सितंबर को खोली गई थी तथा एक माह से भी कम समय में यानी 19 अक्टूबर को वित्तीय बोली खोली गई थी। तकनीकी बोलियों के मूल्यांकन के बाद स्वीकृति पत्र 28 अक्टूबर को जारी किया गया था। अनुबंध शुरू होने की तारीख से कार्यों के पूरा होने की अवधि चार वर्ष है।
बनेंगे रोजगार के अवसर
इस खंड के निर्माण चरण के दौरान, संरेखण के आसपास के क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक विकास के गवाह बनेंगे। न केवल इंजीनियरों, तकनीशियनों, डिजाइनरों, वास्तुकारों जैसे पेशेवरों के लिए, बल्कि कुशल और अर्ध-कुशल कर्मचारियों और निर्माण श्रमिकों के लिए भी रोजगार सृजन होगा। निर्माण सामग्री और मशीनरी जैसे सीमेंट, स्टील, भारी निर्माण मशीनरी, ट्रेन, ट्रेलर की मांग में वृद्धि होगी। आतिथ्य, मनोरंजन, स्वास्थ्य, पर्यटन, अचल संपत्ति एवं आवास तथा शिक्षा जैसे सहायक उद्योग भी निर्माण के दौरान पनपेंगे।

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