अगले वर्ष 2 अक्टूबर तक देश का सबसे स्वच्छ शहर बनेगा अहमदाबाद : नेहरा

अगले वर्ष 2 अक्टूबर तक देश का सबसे स्वच्छ शहर बनेगा अहमदाबाद : नेहरा

Rajesh Bhatnagar | Publish: Sep, 08 2018 10:41:31 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

एएमसी आयुक्त ने जताया विश्वास, ब्रिटिश हाई कमीशन की ओर से यंग थिंकर्स कॉन्फे्रंस में बोले

अहमदाबाद. महानगरपालिका के आयुक्त विजय नेहरा ने विश्वास जताते हुए कहा कि अगले वर्ष 2 अक्टूबर तक अहमदाबाद पूरे देश का सबसे स्वच्छ शहर बनेगा। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद महात्मा गांधी की कर्मभूमि है, यहां साबरमती व कोचरब आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी ने की थी, अगले वर्ष 2 अक्टूबर को गांधीजी का 150वां जन्मदिवस है, इसलिए अहमदाबाद को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने का उन्हें विश्वास है। इसके लिए इस वर्ष 2 अक्टूबर से सॉर्स सेग्रीगेशन की नई शुरुआत की जाएगी।
मनपा आयुक्त नेहरा ब्रिटिश हाई कमीशन के स्थानीय कार्यालय की ओर से फ्लेगशिप फॉरेन एंड सिक्युरिटी पॉलिसी पर यहां पहली बार आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्फ्रेंस में मेकिंग स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटीज एंड फ्यूचर ऑफ क्लीनटेक इन सिटीज विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रोको और टोको, अगर कोई हमारे घर में कचरा फेंकता है तो क्या हम बर्दाश्त करते हैं, हमें शहर को अपना घर समझना होगा।
नेहरा ने कहा कि शहर में प्रतिदिन 4 हजार मेट्रिक टन कचरा होता है, इसे पिराणा डंपिंग साइट पर भेजा जाता है, वहां इस कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए 2 हजार टन क्षमता की मशीने व प्लांट स्थापित करवाए हैं, शेष 2 हजार टन के लिए कार्रवाई जारी है। शहर को क्लीन एंड स्मार्ट बनाने के लिए उपाय कर रहे हैंं। इसके तहत गंदगी फैलाने वाली वाणिज्यिक संस्थाओंं से 1 हजार करोड़ रुपए फाइन वसूलने के बाद अब रास्तों पर कचरा फेंकने व गंदगी करने वालों से भी दण्ड वसूलना शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केवल कैमरों व केबल की ही आवश्यकता नहीं है बल्कि इसके लिए सडक़, कचरा, मवेशी आदि की समस्याओं का समाधान किए बिना स्मार्ट सिटी बनाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबलिटी प्रथम पिलर है, इसके बाद मॉर्डन बनना होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य आदि प्राथमिक आवश्यकताएं अफोर्डेबल होनी चाहिए, तकनीक से केवल सिस्टम सुधारने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट लोगों से ही स्मार्ट सिटी बनाना सम्भव है। ‘स्मार्ट’ का मतलब बताते हुए उन्होंने कहा कि एस यानी सस्टेनेबल (चिरस्थायी), एम यानी मॉर्डन (आधुनिक), ए यानी अफोर्डेबल (वहनीय), आर यानी रिजिलइन्स (लचीलापन), टी यानी टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी)। शहर में 40 लाख वाहन, 2 लाख रिक्शा हैं, लेकिन यह सस्टेन नहीं हो सकते। डिजाइन ऑफ स्ट्रीट व वॉक-वे बनाने होंगे ताकि लोग आसानी से वॉक कर सकें।

कार वालों के लिए एसी इलेक्ट्रिक बसें शीघ्र
उन्होंने कहा कि नॉन मैकेनाइज्ड सपोर्ट के लिए शेयरिंग इनिशिएटिव शुरू करेंगे, इसके तहत एयर कंडीशन (एसी) इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। अब तक इस प्रकार की एक भी बस संचालित नहीं हो रही है लेकिन अगले 6 महीने में इस प्रकार की 50 बसें संचालित करने के लिए ऑर्डर दिया है, सरकार को इसके लिए प्रस्ताव भी भेजा है और इस तरह की 300 और बसें संचालित करने की योजना है ताकि कारों का उपयोग करने वाले लोग भी इन बसों में यात्रा कर सकें।
नेहरा ने कहा कि एक वर्ष में नहीं बल्कि अगले 2-3 महीनों में ऑटोमेटिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू किया जाएगा। डेढ़ वर्ष तक गुजरात राज्य पथ परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक पद पर रहते हुए टेक्नोलॉजी का उपयोग शुरू किया था इसलिए यह सिस्टम शुरू करने में कोई परेशानी नहीं होगी।

मच्छरों से बीमारियों के खिलाफ स्कूलों में जागरुकता अभियान
नेहरा ने कहा कि शहर के हैल्थकेयर विभाग ने लार्वा से होने वाले मच्छरों से होने वाली बीमारियों के खिलाफ 300 स्कूलों में जागरुकता अभियान शुरू किया गया है और इस महीने के अंत तक 1 हजार स्कूलों में यह अभियान चलाया जाएगा।

युवाओं से मांगे सुझाव
नेहरा ने कहा कि भीड़ से अलग होकर अपने सुझाव देने का यंग थिंकर्स के लिए महत्वपूर्ण अवसर है ताकि शहर को क्लीन व स्मार्ट बनाने में मदद मिल सके। इस अवसर पर लुमा सोलर के अंकित जैन, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली की शैली भसीन ने भी विचार व्यक्त किए। कुमार मनीष ने संचालन किया।

लैंगिक समानता पर भी चर्चा
इससे पहले, क्रिएटिंग ए जेंडर इक्वल सोसायटी पर यूनीसेफ की लक्ष्मी भवानी ने कहा कि जेंडर इक्विलिटी सोसायटी बनाने के लिए सरकारी योजनाओं व व कार्यक्रमों में भी जेंडर इक्विलिटी होनी चाहिए। इसके लिए अभिभावकों की मानसिकता भी बदलनी होगी। शारवारू की संस्थापिका शीबा जोर्ज ने कहा कि फ्रीडम ऑफ चॉइस ना होने के कारण भारत में महिलाएं फ्री नहीं मानती हैं, डर व असमानता से भी फ्री नहीं मानतीं। लॉटून्स की संस्थापिका कानन धारू ने कहा कि कार्यस्थल पर 75 प्रतिशत महिलाएं और 21 प्रतिशत पुरुष प्रताडि़त होते हैं। ब्रिटिश हाई कमीशन के गुजरात व राजस्थान के डिप्टी हाई कमीश्नर ज्योफ वेन ने स्वागत भाषण दिया। अदिती रिंदानी ने संचालन किया। अंतिम सत्र में यूथ वॉइस इन पॉलिटिक्स पर सूरत जिले के मजूरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हर्ष संघवी के अलावा श्वेता ब्रह्मभट्ट, रति मेहता, मुदिता विद्रोही, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली की सोफिया नायक लुक ने भी विचार व्यक्त किए। श्याम पारेख ने संचालन किया।

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