कोरोना संक्रमित के मरीजों के लिए नेबुलाइजर के उपयोग में सावधानी जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अन्य स्वास्थ्य संगठनों की ओर से दिशानिर्देश जारी

वेंटिलेटर, आक्सीजन की भांति ही उपयोगी नेबुलाइजर का अधिक उपयोग हानिकारक

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 05 Feb 2021, 11:37 PM IST

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए नेबुलाइजर के उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) सहित अन्य स्वास्थ्य संगठनों की ओर से दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
गुजरात के वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. नरेन्द्र रावल के अनुसार कोरोना वायरस सबसे पहले मरीज के फेफड़ों पर असर करता है। नेबुलाइजर से दी जाने वाली दवाई मरीजे के फेफड़े में जाकर स्थानीय तौर पर प्रभाव डालती है। सांस के रोगियों को अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में, आईसीयू में, वेंटिलेटर के साथ भी नेबुलाइजर से दवाई दी जाती है। यह जीवनरक्षक मशीन है लेकिन, चिकित्सक की निगरानी के बिना और उचित ढंग से इस मशीन से थैरेपी नहीं लेना कभी-कभी बड़ी समस्या भी हो सकती है। हालांकि इसकी वजह से अस्पताल में मरीज का खर्च कम होता है और वह जल्दी स्वस्थ होकर घर जा सकता है।
कोरोनाकाल में नेबुलाइजर के उपयोग के बारे में इंडियन चेस्ट सोसायटी, ब्रिटिश चेस्ट सोसायटी, अमेरिकन फॉरेंसिक सोसायटी ने भी अलग-अलग गाइडलाइन दी है। सामान्यतया घर के लोगों के बीच में रहकर नेबुलाइजर लिया जाता है, अस्पताल में अन्य मरीजों के सामने लिया जाता है लेकिन, ऐसे किसी मरीज को कोरोना है तो दूसरे मरीजों में भी कोरोना फैल सकता है। इसलिए कोरोनाकाल में नेबुलाइजर थैरेपी की गाइडलाइन का पालन करना आवश्यक है।

तीन चरण में अलग कमरे में सावधानीपूर्वक दी जानी चाहिए थैरेपी

कोरोना संक्रमित मरीजों को घर में और अस्पताल में नेबुलाइजर थैरेपी लेने के तीन चरणों का पालन करना चाहिए। नेबुलाइजर थैरेपी लेने के पहले के चरण में घर में हवा-रोशनी वाले अलग कमरे में बैठकर लेनी चाहिए। इससे पहले हाथ को सेनेटाइजर या साबुन से साफ करना चाहिए। प्रतिदिन नई डिस्पोजेबल किट का उपयोग किया जाना चाहिए। दूसरे चरण में नेबुलाइजर से दवाई लेते समय सही स्थिति में कुर्सी पर सीधे बैठकर, गला थोड़ा ऊंचाकर, माऊथपीस या मास्क के जरिए ली जानी चाहिए। मास्क से नेबुलाइजर के जरिए दवाई लेने पर अन्य लोगों को संक्रमण बढऩे की संभावना अधिक है। तीसरे चरण में नेबुलाइजर से दवाई लेने के बाद किट को सही ढंग से डिस्पोज करना चाहिए। कमरे को तीस मिनट तक खुला रखना चाहिए। नेबुलाइजर की मशीन को सेनेटाइजर से साफ करना चाहिए।

थैरेपी के समय स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई किट पहनना आवश्यक

इसी प्रकार अस्पताल में नेबुलाइजर थैरेपी देने के लिए अलग कमरे में या प्लास्टिक के कवर में मरीज को रखा जाता है। चिकित्सक या नर्स या स्टाफ की ओर से पीपीई किट पहनकर मरीज को यह थैरेपी देना आवश्यक है। माऊथ पीस से अस्पताल में और आईसीयू मे भी यह थैरेपी दे सकते हैं। उसके बाद मशीन को सेनेटाइज करना चाहिए और डिस्पोजेबल किट को सही ढंग से डिस्पोज करनी चाहिए।

कोरोनाकाल में आपातकालीन स्थिति में ही देनी चाहिए

कोरोनाकाल में आपातकालीन स्थिति में ही नेबुलाइजर थैरेपी दी जानी चाहिए। आम तौर पर इसका उपयोग कम किया जाना चाहिए। इसके बजाय मरीज को बेबीमास्क लगाकर इन्हेलर से दवाई लेनी चाहिए। इन्हेलर में दवाई, इन्हेलर का चैंबर या डिवाइस और बेबीमास्क भी नेबुलाइजर की ही भांति काम करते हैं। इसके बावजूद नेबुलाइजर का उपयोग करना पड़े तो केवल आपातकालीन स्थिति में अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन का पालन करते हुए ही करना चाहिए। कोरोनाकाल में अपने फिजिशियन या चिकित्सक को बताकर ही नेबुलाइजर थैरेपी लेनी चाहिए। सामान्यतया छोटे बच्चों के लिए साल-दो साल तक भी नेबुलाइजर थैरेपी का उपयोग किया जाता है लेकिन, यह बच्चे के लिए उचित नहीं है। ऐसे बच्चों और वृद्धों को अपने चिकित्सक की निगरानी में ही नेबुलाइजर थैरेपी लेनी चाहिए।

इसे कहते हैं नेबुलाइजर थैरेपी

नेबुलाइजर छोटी एक-दो किलो वजन वाली इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में पोर्टेबल मशीन है। यह दवा के तरल रूप को छोटे-छोटे बारिक कणों में रूपांतरित करता है। ब्रोंकेल अस्थमा, क्रॉनिक ओब्स्टे्रक्टिक पल्मोनोरी डिजिज (सीओपीडी), क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एंफीसीमा के मरीजों के फेफड़े की सांस नली में उपयोग किए जाने वाले नेबुलाइजर को घर मेंं भी काम लिया जा सकता है, इसे नेबुलाइजर थैरेपी कहते हैं।

आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में और आईसीयू में भी इसका उपयोग होता है। आंख और कान के रोग में दवाई की बूंदें डालते हैं, चमड़ी के रोग होने पर क्रीम या ट्यूब लगाते हैं, दर्द होने पर दर्द निवारक दवाई लेते हैं उसी प्रकार नेबुलाइजर से फेफड़े में जाकर फेफड़े के रोगों पर दवाई त्वरित असर करती है।
नेबुलाइजर में आम तौर पर सांस नली खोलने की ब्रोंकोडायलेटर दवा का तरल पदार्थ और सांस नली में सूजन आने पर एंटी इन्फलेमेटरी स्टीरॉइड और दवाई का तरल पदार्थ उपयोग किया जाता है। इनके अलावा फेफड़े में बलगम होने पर निकालने के लिए म्युकोलाइटिक तरल पदार्थ भी दवाई के तौर पर दिया जाता है। फाइब्रोसिस के मरीज को संक्रमण खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाई भी नेबुलाइजर से दी जाती है।

इनके लिए है उपयोगी

आमतौर पर छोटे बच्चे इन्हेलर से दवाई नहीं ले पाते और उन्हें जब अस्थमा एवं एलर्जिक ब्रोंकाइटिस होता है तो चिकित्सक की निगरानी में नेबुलाइजर का उपयोग किया जाता है। इनके अलावा इन्हेलर से और डिस्पेंसर से भी दवाई नहीं ले पाने वाले वृद्धों को भी नेबुलाइजर से दवाई दी जाती है।

Rajesh Bhatnagar
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