यहां उल्टी दिशा में चलती हैं घडिय़ां

यहां उल्टी दिशा में चलती हैं घडिय़ां

Gyan Prakash Sharma | Publish: Jul, 13 2018 11:18:12 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

आदिवासी समाज में प्राचीन परम्परा की घड़ी, बाएं से दाहिनी ओर चलते हैं आंकड़े

वडोदरा. आम तौर देखा जाता है कि हर घड़ी दाहिनी ओर से बायीं तरफ चलती है, लेकिन पंचमहाल जिले के आदिवासी क्षेत्र में जो घड़ी हैं, उनके आंकड़े बायीं से दाहिनी ओर चलते हैं। आंकड़े भले ही उल्टी दिशा में हैं, लेकिन घड़ी की सुइयां दाहिनी से बायीं ओर ही चलती हैं।
आदिवासी समाज आज भी अपनी प्राचीन परम्परा को नहीं भूला है और परम्परा के अनुसार सभी कार्य बायीं से दाहिनी ओर कर रहे हैं। यहीं कारण है कि पंचमहाल जिले में आदिवासी समुदाय के घरों में प्रवेश करोगे तो वहां दीवारों पर अलग ही प्रकार की घडिय़ां लटकी मिलेंगी।
समय देखने के लिए बनाई गई यह सभी घडिय़ां बाएं से दायीं ओर घूमती है। आदिवासी समाज की ओर से बनाई गई यह घडिय़ां उल्टी होने के बावजूद समय सही बताती हैं।
ब्रह्मांण, विज्ञान, धर्म व प्रकृति के साथ ताल मिलाने वाली यह आदिवासी घडिय़ां फिलहाल आदिवासी क्षेत्रों में आकर्षण का केन्द्र बनी हैं। आदिवासी समुदाय के लोगों में प्राचीन परम्परा के अनुसार उल्टी दिशा में घूमने वाली घडिय़ां बनाई जाती हैं।
बिरसा मुंडा के फोटोवाली यह घडिय़ा दुनिया की अन्य घडिय़ों से अलग हैं। विरसा मुंडा आदिवासी समाज में आदरणीय माने जाते हैं, जिससे घड़ी में उनकी तस्वीर लगाई जाती है। आज भी इस प्रकार की घडिय़ां समाज के अधिकतर घरों में देखने को मिलती हैं।


यह है मान्यता :
आदिवासी समाज के लोगों का मानना है कि आदिवासी प्रकृति पूजक हैं और वर्षों से प्रकृति की पूजा करते आए हैं। उनके मतानुसार ब्रह्मांण में सूर्य के चक्कर लगाते समय पृथ्वी सहित अन्य ग्रह दायीं से बायीं ओर घूमते हैं। पेड़ की वेल दाहिनी से बायीं ओर झुकी रहती हैं। पृथ्वी भी अपनी धुरी पर दाहिनी से बायीं ओर घूमती है। विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार इलेक्ट्रोन भी अणु के चारों ओर दाहिनी से बायीं ओर खिंचते हैं। इन सभी मान्यताओं को ध्यान में रखकर आदिवासी समाज दाहिनी ओर से हल चलाते हैं।
आदिवासी समाज का मानना है कि यह दिशा सही दिशा है, इसलिए घड़ी के आंकड़े भी बायीं ओर बनाए गए हैं।

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