जेल में नारियल पर प्रतिबंध: कैदी की गुहार पर करेें निर्णय

-हाईकोर्ट का साबरमती जेल प्रशासन को निर्देश

Uday Kumar Patel

September, 1310:05 PM

Ahmedabad, Gujarat, India

 

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय में शहर के साबरमती जेल में नारियल पर प्रतिबंध के मामले में जेल प्रशासन से कैदी की गुहार पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय करने को कहा है। न्यायाधीश ए. वाई. कोगजे ने याचिकाकर्ता कैदी से जेल प्रशासन के समक्ष उचित गुहार लगाने को कहा है। इस संबंध में राज्य की जेलों में अपनाई जाने वाली प्रणाली के बारे में भी विवरण देने का निर्देश दिया। इस गुहार के आधार पर न्यायालय ने जेल प्रशासन से जल्द से जल्द 21 दिनों के भीतर निर्णय लेने को कहा।
कैदी गौतम रामानुज की ओर से साबरमती जेल में नारियल ले जाने पर प्रतिबंध के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इसमें कहा गया कि जेल प्रशासन ने जेल में नारियल ले जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। वर्ष 2017 में साबरमती जेल अधीक्षक की ओर से पर्व-त्यौहारों पर पूजा व अन्य संबंधित विधि के लिए जेल में कैदियों को मिलने वाले नारियल पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नारियल जेल की कैन्टीन से दिया जाता था, लेकिन अज्ञात कारणों से इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। धार्मिक विधियों में कैदियों को नारियल की जरूरत होती है।
इस याचिका पर जेल प्रशासन ने शपथपत्र पेश कर बताया कि जेल की सुरक्षा के कारणों को लेकर यह निर्णय लिया गया। नारियल एक मजबूत और सख्त पदार्थ होता है और कैदियों की ओर से इसका गलत रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। जेल में कुछ खूंखार अपराधियों के बंद होने और जेल के संवेदनशील इलाका होने के कारण नारियल का इस्तेमाल जघन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने साबरमती जेल प्रशासन को यह निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जो जानकारी दी गई है उसे देखते हुए यह निर्देश दिया गया है।

Uday Kumar Patel
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