श्रृंगारित ऊंटों ने जमाया आकर्षण

धूमधाम से निकली शोभायात्रा, गोलोकधाम में नूतन मंदिर का निर्माण कार्य शुरू

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 13 Mar 2018, 10:54 PM IST

प्रभासपाटण. यहां त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित श्रीकृष्ण के दिव्य निजधाम गोलोकधाम में नूतन मंदिर निर्माण एवं संकुल विकास का संकल्प प्रारंभ किया गया। इससे पूर्व, मंगलवार को धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। बारह ज्योतिर्लिंग में प्रथम श्री सोमनाथ महादेव मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा गोलोकधाम में पूर्ण हुई।
सोमनाथ में आयोजित इस भव्य महोत्सव के मौके पर मुम्बई के भामाशाह संतोष शारदा एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष केशूभाई पटेल उपस्थित रहे।
महोत्सव के दौरान मंगलवार सुबह सोमनाथ मंदिर से गोलोकधाम तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रृंगारित ऊंट, शिवजी के स्वरूप एवं श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन झांकी, ढोल-शहनाई, बैंड एवं दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्र व मंत्रोच्चारण के साथ शोभायात्रा निकाली गई।

स्थल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया
इस स्थल पर नदी का तट होने के कारण वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया है। इस स्थल पर ध्यान कुटीर, लेजर शो एवं भगवान श्रीकृष्ण-भगवान विष्णु के जीवन से जुड़ी झांकी व आध्यात्मिक संदेश देने वाले प्रदर्शन खंड भी बनेंगे। श्री गोलोकधाम के विकास का संकल्प सोमनाथ विश्वस्त मंडल की ओर से किया गया है। भामाशाह शारदा परिवार की ओर से तीर्थ निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। इस मौके पर दाता परिवार का श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष केशूभाई पटेल की ओर से सम्मान किया गया।

विभिन्न कार्यक्रम आयोजित
ट्रस्ट के अध्यक्ष केशूभाई पटेल ने बताया कि गोलोकधाम संकुल में पिछले तीन दिनों से यज्ञ, पूजा सहित विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। चौथे दिन मंगलवार को शोभायात्रा निकाली गई। महोत्सव के प्रथम दिन भूमि पूजन कर अशुद्धियों को दूर करने के लिए यज्ञ किया गया। दूसरे दिन गजानन पूजा करके निर्माण कार्य में विध्न नहीं हो, इसके लिए पूजा की और तीसरे दिन यानि सोमवार को मां दुर्गा का पूजन किया गया। शाम को नौ बालिकाओं का, १०८ ब्राह्मणों का एवं ११ दम्पत्तियों का पूजन किया गया। महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा की गई पांच ईटों सहित ५०० ईंटों से नूतन मंदिर के निर्माणकार्य का प्रारंभ किया गया।


महोत्सव के साथ-साथ
कर्नाटक व मेंगलोर के ५० ब्राह्मण व दक्षिण पूजा शैली के वाद्य कलाकारों ने भाग लिया। गीता मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर में पंचवर्ण रंगोली सजाई गई, जिसमें चक्राभ्य मंडल, विष्णु आराधना, नागदोष परिहार, आश्लेषा बलि नाग दोष निवारण, नवगृह शांति, महामृत्युंजय हवन, वन दुर्गा सुदर्शन हवन, अधोरास्त्र हवन, १०८ नारियल गणपति पूजन, दुर्गापूजन, रंगपूजा सहित पूजन उडीपी शिवल्ली ब्राह्मणों की ओर से किया गया। समग्र गोलोकधाम भूमि को रंगबिरंगी रोशनी से सजाया गया।

Gyan Prakash Sharma
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