अब केले के कचरे से बनेगी कीमती खाद

Banana Waste, Compost, Anand Agricultural University

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 27 Nov 2019, 04:45 PM IST

आणंद. समग्र देश में केले का सबसे अधिक उत्पादन गुजरात में होता है। गुजरात में यह उत्पादन आणंद जिले के लांभवेल, बोरियावी, बोरसद सहित अनेक गांवों में होता है। उत्पादन के बाद केले के कचरे (पौधे एवं पत्तियों) को फेंकना एक समस्या है। इस समस्या का हल आणंद कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) के वैज्ञानिकों ने निकाला है। उन्होंने एक ऐसा शोध किया है जिसमें केले के कचरे से वनस्पति खाद बना सकेंगे।


आणंद कृषि विश्वविद्यालय के कृषि सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं प्रभारी कुलपति डॉ. आर. वी. व्यास ने बताया कि कृषि विवि के वैज्ञानिकों की शोध को 'बायोडिग्रडरÓ नाम दिया गया है। अनुभव बेक्टीरियल बायोडिग्रेडर कन्सोर्टियम (एबीबीसी) केले की खेती से निकलने वाले एग्रो वेस्ट को कम समय में ही खाद में बदल देता है। आणंद सहित राज्ये में विभिन्न स्थलों पर किसानों के साथ एबीबीसी का सफल प्रयोग किया गया है।

ऐसे बनेगा खाद

मध्य गुजरात में केले के पौधे एवं पत्तियों से होने वाले कचरे से उच्च गुणवत्तायुक्त खाद बनाने नई पद्धति विकसित की गई है। इसके अनुसार प्रति टन केले के कचरे में एक लीटर एबीबीसी व पांच फीसदी गाय का गोबर उपयोग किया जाता है। इसमें केले के थड़ के टुकड़े कर उसे सूर्य की रोशनी में सुखाकर प्लास्टिक बेड में भरा जाता है और केले के थड़ के टुकड़े भिंगोने के लिए आवश्यकता अनुसार पानी का छिड़काव किया जाता है। एक सप्ताह बाद उसमें एबीबीसी पानी में मिलाकर केले के थड़ के कचरे पर छिड़का जाता है और इसी अनुसार गाय के पांच किलो गोबर की लेप फैलाकर उसमें गिंजाई डालते हैं। इसमे वर्ककंपोस्ट तैयार हो जाता है। इसके १० दिन बाद उसे बेड से निकालते हैं और छलनी से छानकर वर्मी कंपोस्ट (कृमि वनस्पति खाद) तैयार हो जाता है। इस तरह सिर्फ ७०-७५ दिनों में वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाता है। इससे किसानों की केले के कचरे (पत्ते व थड़) की समस्या भी हल हो जाएगी।

कचरे की समस्या से मिलेगी निजात

आणंद के लांभवेल निवासी किसान का कहना है कि वह हर वर्ष अपनी ढाई बीघे जमीन में केले की खेती करते हैं। प्रत्येक पौधे से करीब ३० किलो केले का उत्पादन होता है, लेकिन बाद में केले के थड़ व पत्तों की फेंकने की समस्या हो जाती है। ऐसे में अब केले के कचरे से खाद बनेगा तो कचरे की समस्या से निजात मिलेगा।
किसान विशाल पटेल के अनुसार केले की फसल तैयार होने के बाद उसके कचरे को फेंकने के लिए मजदूरों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब शोधकर्ताओं ने नए रास्ता दिखाया है।

Gyan Prakash Sharma
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