दोषी ठहराए जाने पर असाधारण परस्थितियों में ही लगाई जानी चाहिए रोक

-लोकसभा चुनाव लडऩे की हार्दिक की याचिका

By: Uday Kumar Patel

Published: 29 Mar 2019, 12:02 AM IST

 

अहमदाबाद. लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल की ओर विधायक कार्यालय तोडफ़ोड़-आगजनी प्रकरण में दोषी ठहराए जाने पर रोक की गुहार को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई।
गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष राज्य सरकार की ओर से दलीलों दी गई जिसमें हार्दिक की याचिका का विरोध किया गया।
महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने दलील दी कि किसी भी आरोपी को दोषी ठहराया जाए तो ऐसे में असाधारण परिस्थिति में ही रोक लगाई जानी चाहिए। रोक लगाने से पहले सभी मुद्दों को ध्यान में लेना चाहिए। आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता को दोषी ठहराए जाने के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो किस नुकसानकारक परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा, इस बात की स्पष्टता नहीं की गई है।

यह भी दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को महिलाओं के साथ-साथ अन्य समुदायों के लिए कोई मान नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता ऐसा आचरण करता है जिससे लगता है कि उसे कानून का भी डर नहीं है।

उधर हार्दिक की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को दोषी ठहराए जाने के आदेश पर क्यों रोक नहीं लगाई जानी चाहिए, इसकी स्पष्टता राज्य सरकार की ओर से नहीं की गई है। इस मामले में किसी भी गवाह ने हार्दिक को घटना स्थल पर नहंीं देखे जाने का सबूत नहीं दिया है।
पाटीदार नेता से बने कांग्रेस नेता हार्दिक ने तोडफ़ोड़ और आगजनी प्रकरण में उन्हें 2 वर्ष की सजा के लिए दोषी ठहराए जाने पर रोक लगाने की गुहार लगाते हुए याचिका दायर की है जिससे वे लोकसभा का चुनाव लड़ सके।

Uday Kumar Patel Reporting
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