कोरोना की दूसरी लहर: 95 प्रतिशत डेवलपर्स को परियोजना में देरी का डर

Corona, Credai, survey, report, developer, india, second wave, inquiry, purchase postponed क्रेडाई की कोरोना प्रभाव आधारित पहली रिपोर्ट, देश के 217 शहरों के 4,813 डेवलपर्स हुए शामिल,90 प्रतिशत डेवलपर्स का मानना दूसरी लहर व्यवसाय पर अधिक भारी श्रमिकों की कमी, वित्तीय बाधाएं, मंजूरी में देरी, मांग में गिरावट चुनौतियां

By: nagendra singh rathore

Published: 11 Jun 2021, 09:21 PM IST

अहमदाबाद. कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि कोरोना की दूसरी लहर पहले के मुकाबले ज्यादा नुकसानदेह रही।
देशभर में स्टार्टीफाइड सैंपलिंग मेथड के जरिए पहली बार 24 मई से 3 जून 2021 के बीच 217 शहरों में 4,813 डेवलपर्स से बातकर रिपोर्ट तैयार की। परियोजनाओं की जमीनी हकीकत को भी देखा।
रिपोर्ट के मुताबिक 95 प्रतिशत से अधिक डेवलपर्स मानना है कि इससे परियोजना में विलंब हो सकता है।
92 प्रतिशत डेवलपर्स को निर्माण स्थल पर श्रमिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 83 प्रतिशत डेवलपर्स आधे से भी कम कार्यबल के साथ काम कर रहे हैं। 82 प्रतिशत से अधिक डेवलपर्स परियोजना मंजूरी में देरी का सामना कर रहे हैं। विभिन्न वित्तीय बाधाएं और तरलता की कमी समस्या को और बढ़ा रही है। 77 प्रतिशत डेवलपर्स को मौजूदा ऋण की सर्विसिंग में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 85 प्रतिशत डेवलपर्स को नियोजित संग्रह में व्यवधान हो रहा है। 69 प्रतिशत ग्राहक होम लोन के वितरण में समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
स्टील, सीमेंट आदि सहित निर्माण सामग्री में हालिया तेजी से 88 प्रतिशत से अधिक डेवलपर्स के लिए निर्माण लागत 10 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

९५ फीसदी ग्राहकों ने खरीदी टाली, पूछताछ में कमी
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि दूसरी लहर की वजह से 95 प्रतिशत ग्राहकों ने अपनी खरीद निर्णय को स्थगित कर दिया। इसके अलावा 98 प्रतिशत डेवलपर्स कम ग्राहक पूछताछ का सामना कर रहे हैं। 42 प्रतिशत डेवलपर्स ग्राहक पूछताछ में 75 प्रतिशत की गिरावट का अनुभव कर रहे हैं।

सरकार से राहत की गुहार
क्रेडाई नेशनल के अध्यक्ष हर्ष वर्धन पाटोदिया ने कहा कि हमने सरकार-आरबीआई से राहत की गुहार लगाई है। मांग की है कि तरलता निवेश, ऋण का एकमुश्त पुर्नगठन हो। रेरा द्वारा सभी के लिए परियोजना पूरा होने की तारीख में 6 माह का विस्तार किया जाए। स्टाम्प शुल्क में कमी या छूट दी जाए। मूलधन और ब्याज भुगतान पर छूट में छह माह का विस्तार दिया जाए। एसएमए वर्गीकरण को एक और साल के लिए टाला जाए। निर्माण सामग्री की लागत में कमी हो। परियोजना मंजूरी के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस को लागू हो। सभी सेक्टर्स के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की मंजूरी दी जाए।

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