टीका लगवाने से पहले करें रक्तदान, बचेगी कईयों की जान

Corona, Gujarat, blood donation, before vaccine, Ahmedabad, ngo, blood bank -वैक्सीन लेने के बाद एक महीने तक नहीं कर सकते हैं रक्तदान, ब्लडबैंकों को रक्त की कमी की चिंता

By: nagendra singh rathore

Published: 02 May 2021, 08:37 PM IST

नगेन्द्र सिंह/ओमप्रकाश शर्मा

अहमदाबाद. कोरोना के जानलेवा संक्रमण से खुद को सुरक्षित करने के लिए एक मई से कोरोना का टीके लगना शुरू हुआ है। टीकालेने से पूर्व स्वस्थ्य व्यक्ति को रक्तदान करने की जरूरत है। वरना् आप चाहते हुए भी रक्तदान के जरिए किसी की जिंदगी नहीं बचा सकेंगे।
ऐसा इसलिए है क्योंकि टीका लगवाने के बाद आप एक महीने (28)दिन तक रक्तदान नहीं कर सकते हैं। कुछ लोग २८ दिन बाद दूसरा टीका लगवाने को भी प्राथमिकता देंगे, ऐसे में दो महीने (५६) दिन तक रक्तदान नहीं किया जा सकेगा। यदि ऐसा हुआ तो रक्त की भारी कमी के चलतेे भी कई लोगों की सांसे थम सकती हैं। क्योंकि ८५ फीसदी रक्तदाता १८-४५ साल की आयुवर्ग का है। कोरोना महामारी के चलते पहले की तुलना में वैसे भी रक्तदान में गिरावट दर्ज की गई है। अगर आप रक्तदान करके टीका लगवाते हैं तो आपके दान किए रक्त का स्टॉक करके ४२ दिन तक लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। बशर्त रक्त नियमित होने वाले दान से काफी ज्यादा एकत्र हो।
इसके लिए गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन (जीएससीबीटी) की ओर से राज्य की सभी १६७ ब्लड बैंकों को संदेश भेजा है कि वे रक्तदान को बढ़ावा दें। ब्लड बैंकों की ओर से भी लोगों तथा सामाजिक संस्थाओं को टीके से पहलेे रक्तदान की अपील की जा रही है।

कोरोना के चलते २५ हजार यूनिट की आई कमी
कोरोना के चलते लोगों में डर है। आम दिनों में गुजरात में प्रतिमाह ७५-८० हजार यूनिट रक्त एकत्र होता था। लेकिन संक्रमण काल शुरू होने के बाद से आज यह प्रति माह घटकर ५०-५५ हजार यूनिट ही रह गया है। हालांकि इस बीच ट्रोमा की घटनाएं, सर्जरी कम होने से रक्त की ज्यादा कमी नहीं हो रही है।


७० फीसदी जरूरत थैलेसीमिया-गर्भवती को
टीका से पहले रक्तदान की अपील का मुख्य उद्देश्य रक्तदान के संकट को टालना है। ८५ फीसदी रक्तदाता १८-४५ साल के है। टीके के बाद वे २८ दिन तक रक्तदान नहीं करेंगे। इसके चलते संकट पैदा ना हो यह जरूरी है। क्योंकि दान में मिलने वाले रक्त का ७० फीसदी खपत थैलेसीमिया, गर्भवती महिलाएं एवं ट्रोमा के पीडि़तों पर होती है। ऐसे में यदि किसी ने २८ दिन के बाद भी रक्तदान की जगह अगर युवाओं ने दूसरे टीके को प्राथमिकता दी तो ५६ दिन तक रक्तदान में नहीं मिलेगा। इसके लिए सभी १६७ ब्लड बैंकों, नियमित रक्तदाताओं, सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाओं को मैसेज भेजे हैं। प्रतिभाव ही अच्छा मिल रहा है।
-डॉ जिग्नेश जामबुकिया, संयोजक, जीएससीबीटी

विद्यार्थियों, समाज को कर रहे हैं जागरुक
जो संक्रमित नहीं हुए हैं उन्हें टीके से पहले रक्तदान को और जो संक्रमित हो चुके हैं उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए एल.डी.इंजीनियरिंग के ऐसे विद्यार्थियों का डाटा तैयार कर रहे हैं जो इसके लिए तैयार हो रहे हैं। जैन समाज के लोगों को भी टीके से पहले रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-प्रो.सी.एस.संघवी, १८८ बार कर चुके हैं रक्तदान

लोगों को कर रहे जागरुक, नियमित रक्तदाता तैयार
टीका लगवाने के २८ दिन तक रक्तदान नहीं कर सके हैं। जिससे लोगों को टीका लेने से पहले और २८ दिन के बाद दूसरा टीका लेने से पहले रक्तदान के लिए जागरुक कर रहे हैं। नियमित रक्तदाता इसके लिए आगे आ रहा है। ९ हजार थैलेसीमिया पीडि़तों में से ४७०० को हम नियमित रक्तप्रदान कर रहे हैं। उम्मीद है इस दौर में भी कमी नहीं होगी।
-डॉ.प्रकाश परमार, महासचिव, इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, गुजरात

ये है २८ दिन बाद रक्तदान की वजह
टीका देकर हम इम्युनिटी डेवलप कर रहे हैं। इसको लेकर अभी सभी पहलुओं पर अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे में ज्यादा सुरक्षित है कि हम टीका लेने के २८ दिन बाद रक्तदान करें।
-डॉ.अनिल खत्री, चिकित्सक, अहमदाबाद

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