फिर बढ़ा कोरोना का खतरा

गुजरात में पिछले कुछ दिनों में संक्रमण के मामले बढ़े

नहीं संभले तो पड़ सकता है भारी

इंग्लैण्ड की बजाय अफ्रीका का स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 17 Feb 2021, 11:37 PM IST

राजेश भटनागर/ओम प्रकाश शर्मा

अहमदाबाद. समूचे विश्व को एकसाथ चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या एक बार फिर बढऩे लगी है। महाराष्ट्र और केरल में संक्रमण बढऩे फिर बढ़ा है वहीं गुजरात में भी चुनावी माहौल के बीच पिछले कुछ दिनों से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार नवंबर-2019 में शुरुआत पहली बार पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में कोरोना वायरस ने स्वरूप बदला है। विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से संक्रमितों की संख्या 70 प्रतिशत तेजी से बढ़ती है। यानी पहले वाला वायरस 100 संक्रमित मरीजों से 110 में फैलता था जबकि नए स्ट्रेन वाला वायरस 100 से 170 लोगों में फैल सकता है। इसलिए कोविड संबंधी गाइड लाइन का सख्ती से पालन ही उपाय है। नहीं संभले तो भारी पड़ सकता है।
गुजरात के वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन एवं गुजरात चेस्ट फिजिशियन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र रावल ने यह जानकारी दी है। वे वायरस का स्वरूप बदलने के बारे में पिछले वर्ष मई महीने में ही संकेत दे चुके हैं। डॉ. रावल ने कहा कि यूके में पिछले वर्ष अक्टूबर महीने से नया स्ट्रेन चालू हुआ और फिलहाल शीर्षस्तर पर है। यानी पहले वाला वायरस 100 संक्रमित मरीजों से 110 में फैलता था जबकि यूके की नई स्ट्रेन वाला वायरस 100 से 170 लोगों में फैलता है। यह नई स्ट्रेन दक्षिण अफ्रीका में भी मौजूद है। अन्य पांच-सात देशों में भी यह स्ट्रेन है लेकिन, वह निश्चित नहीं है इसलिए वहां जांच की जा रही है।
डॉ. रावल ने कहा कि अब तक यूके से भारत आए 100 मरीज नए स्ट्रेन से संक्रमित हैं लेकिन, राहत की बात यह है कि भारत में एक भी व्यक्ति अब तक कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित नहीं है। यह नया स्ट्रेन केवल तेजी से फैलती है और अधिक लोगों पर असर करती है। यह जानलेवा नहीं है, इसके लिए भी कोरोना का मौजूदा उपचार ही कारगर है। कोरोना के बचाव के लिए लगाए जा रहे वैक्सीन ही नए स्ट्रेन के लिए भी उपयोग किए जा सकते हैं। नए स्ट्रेन की जटिलताएं कम होने के कारण अस्पताल का बिल नहीं बढ़ेगा और इससे जंग जीतने के बाद मरीजों में किसी प्रकार की जटिलता नहीं बढ़ती।

छूट मिलने के कारण फिर से बढ़ रहे कोरोना संक्रमित

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर महीने में दिवाली के पर घूमकर आने वाले लोगों के कारण कोरोना संक्रमितों की संख्या एकदम बढ़ी। उसके बाद रात्रि कफ्र्य लागू किया गया, विवाह समारोह, मेले, अनावश्यक समारोह, कार्यक्रम, आयोजन बैठकें बंद थीं। इस कारण जनवरी महीने में कोरोना संकमितों की संख्या कम होने लगी। दक्षिण अफ्रीका, यूके का नया कोरोना स्ट्रेन भारत में आने के कारण और वाहनों में घूमने, जुर्माना चुकाने के बाद भी सवेरे-शाम के समय बिना मास्क के खुलेआम घूमने के कारण कोरोना संक्रमितों की संख्या दुबारा बढऩे लगी है, यह संख्या और बढ़ भी सकती है।

दोहरे मौसम में खांसी, जुकाम हो तो कोरोना की जांच करवाएं

उन्होंने कहा कि सभी लोगों को आवश्यक तौर पर मास्क पहनना, समूह में यानी विवाह समारोह, आयोजनों, कार्यक्रमों, बैठकों, सिनेमा हाल, वाहनों में भी मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के साथ ही सेनेटाइजर से हाथ साफ करने व साबुन से हाथ धोने की आदत का आवश्यक तौर पर पालन करना चाहिए। दोहरे मौसम के कारण मौजूदा समय में खांसी, जुकाम होने पर घरेलु उपचार के अलावा अपने चिकित्सक से मिलकर सलाह के अनुरूप दवाई लेनी चाहिए। तीन-चार दिन में नहीं मिटने पर कोरोना की जांच करवानी चाहिए।

चुनावी सभाओं में निशुल्क मास्क वितरण की व्यवस्था हो

डॉ. रावल ने कहा कि वर्तमान में चुनावी मौसम के दौरान सभी को सभाओं में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के साथ ही अनिवार्य तौर पर मास्क लगाना चाहिए। मतदान के समय सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सेनेटाइजर का उपयोग करना चाहिए। चुनावी सभाओं में निशुल्क मास्क वितरित करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

मतदान बूथों पर कोरोना जांच की सुविधा हो

डॉ. रावल ने कहा कि मतदान बूथों पर कोरोना महामारी के लिए आवश्यक सुविधाओं की सरकार की ओर से व्यवस्था की जानी चाहिए। फिलहाल कोरोना जांच के अधिकांश बूथ बंद होने के कारण बड़े मतदान बूथों पर कोरोना जांच की सुविधा भी उपलब्ध करवानी चाहिए।

यूके से ज्यादा खतरनाक है अफ्रीका का नया स्ट्रेन कोरोना

वर्तमान में कोरोना के प्रति जिस तरह से लोग ढिलाई बरत रहे हैं उसके परिणाम आगामी दिनों में ज्यादा खतरनाक हो सकते है। हाल में चुनावी माहौल के साथ-साथ क र्यू में भी आंशिक छूट मिल रही है। ऐसे में लोगों को सावधानी की अति आवश्यकता है। गाइडलाइन का पालन करने पर संभला जा सकता है अन्यथा मार्च माह के पहले फिर कोरोना के केस तेजी से बढ़ सकते हैं। ज्यादा मामलों के बीच कोरोना का नया स्ट्रेन भी फैल सकता है। इसमें यूके से अधिक खतरनाक अफ्रीकी नया स्ट्रेन माना जा रहा है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अफ्रीका के नए स्ट्रेन से वैक्सीन प्रभावी है या नहीं।
- डॉ. मोना देसाई, अध्यक्ष एएमए
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जनता को सतर्कता बरतने की जरूरत

दीपावली से पहले जो ढिलाई बरती गई थी उसके परिणाम काफी परेशान करने वाले रहे। बड़ी सं या में कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे थे। हालांकि सरकार ने बिना विलंब किए कड़ाई बरती थी जिससे मामलों की सं या में काफी कमी आई थी। चुनावी माहौल में लोग बड़ी सं या में एक साथ नजर आ रहे हैं। ऐसे में उन्हें सतर्कता की जरूरत हैं क्योंकि अभी तक जो वैक्सीन लगाई जा रही है वह प्राथमिक चरण की है दूसरे चरण की बाकी है। इसके अलावा वैक्सीन कोरोना वॉरियर्स को ही दी जा रही है। कोरोना के नए स्ट्रेन से भी संभलने की आवश्यकता है। इससे सबसे अच्छा बचाव मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंस का पालन करना है। यदि नहीं संभले तो अगले सप्ताह और भी मरीजों में वृद्धि हो सकती है।
- डॉ. प्रवीण गर्ग, सीनियर फिजिशियन अहमदाबाद

पिछले कुछ दिनों में गुजरात में नए मरीज

5 फरवरी 267
6 फरवरी 252
7 फरवरी 244
8 फरवरी 232
9 फरवरी 234
10 फरवरी 255
11 फरवरी 285
13 फरवरी 279
१४ फरवरी 247
15 फरवरी 249
16 फरवरी 263

Rajesh Bhatnagar
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