कोरोनाकाल में 6.98 लाख लोग पहुंचे मानसिक अस्पताल, 5.67 लाख को करना पड़ा भर्ती

Covid, Mental patient OPD, suicides rise, helpline, Ahmedabad mental hospital मददभरे दो बोल आत्महत्या रोकने में अनमोल, आत्महत्या की घटनाओं में भी हुआ 10-15 फीसदी का इजाफा, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मानसिकरोग हॉस्पिटल में जागरुकता कार्यक्रम

By: nagendra singh rathore

Updated: 10 Sep 2021, 10:29 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक-आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी प्रभावित किया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना काल (2020-21) में गुजरात के 33 जिलों के मानसिक रोग अस्पतालों की ओपीडी में 6.98 लाख पहुंचे थे। इसमें से 5.67 लाख लोगों को मानसिक रोग अस्पतालों में भर्ती करके चिकित्सा देनी पड़ी।
यह जानकारी अहमदाबाद मानसिक रोग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौहान ने दी।
वे विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर अहमदाबाद के मानसिक रोग अस्पताल में आयोजित मीडिया संवाद के जरिए जागरुकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. चौहान ने बताया कि राज्य के 33 जिलों, चार महानगरों में राज्य सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। मेडिकल टीम की ओर से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी की जा रही है। जरूरी परामर्श, दवाईयां भी दी जा रही हैं। इस सेवा के तहत 2020-21 में कोरोनाकाल के दौरान 6.98 लाख लोग ओपीडी में पहुंचे।
डॉ.चौहान ने बताया कि कोरोनाकाल में सामान्य सालों की तुलना में आत्महत्या के मामलों में 10-15 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। इसके लिए लोगों की सामाजिक, शारीरिक और मानसिक स्थिति जिम्मेदार है। ऐसे किस्सों को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से 104 और 1100 टेलीमेडिसिन हेल्पलाइन व ई-संजीवनी हेल्पलाइन शुरू की। इन हेल्पलाइन पर कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बताए बिना मदद पा सकता है।

पांच साल में गुजरात सातवें से 12वें स्थान पर
डॉ.चौहान ने बताया कि गुजरात सरकार ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिसका असर है कि 2017 में गुजरात आत्महत्या के मामले में देश में सातवें स्थान पर था जो 2020 में 12वें स्थान पर आ पहुंचा है। एक सर्वे के अनुसार देश में हर एक लाख में 11.07 व्यक्ति आत्महत्या करते हैं, गुजरात में यह दर 11.02 है। एनसीआरबी के तहत गुजरात में 7488 व्यक्तियों ने वर्ष 2020 में आत्महत्या की।

आपके सुहानुभूति भरे शब्द बचा सकते हैं जान
डॉ.चौहान ने बताया कि कोई समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि आप से बातचीत करे और उस दौरान यदि आप उससे कहें कि आप उसके साथ हैं। उसकी मदद करेंगे तो वह आत्महत्या करने के विचार से उबर सकता है। उसकी जिंदगी बच सकती है। डॉ दीप्ति भट्ट ने आत्महत्या प्रेरित तत्वों से लोगों को कैसे दूर रख सकते हंै उसकी जानकारी दी।

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