Ahmedabad News : मूक-बधिर महिला ने संकेतों व रंगों की भाषा से दी कोरोना को मात

सुरेन्द्रनगर के कोविड-19 अस्पताल में...

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 17 Jun 2020, 11:14 PM IST

राजकोट. कोरोना को मात देने वाले अनेक रोगियों ने लोगों को आश्चर्यचकित किया है। इनमें 90 वर्षीय वृद्धा से जुड़वां नवजात भाई बहन शामिल हैं। ऐसी एक उपलब्धि हासिल की है सुरेन्द्रनगर जिले की मूक बधिर महिला ने। उसने संकेतों व रंगों की भाषा से कोरोना को मात दी है।
सुरेन्द्रनगर जिले की पाटडी तहसील के गवाणा गांव निवासी दिव्यांग दंपती में शिल्पीबेन गज्जर व जयदीप गज्जर ऐसे मूक-बधिर दंपती हैं जो दृढ़ मनोबल से अपने जीवन के रथ को चला रहे हैं। इस दौरान शिल्पीबेन कोरोना वायरस के संक्रमण की शिकार बनी।
वह गर्भवती होने के कारण उपचार के लिए पति के साथ लॉक डाउन से पहले अहमदाबाद स्थित पीहर गई थी। उपचार के बाद वह गांव लौट आई। सरकार की मार्गदर्शिका के अनुरूप वे होम क्वारंटाइन में रहे। कोरोना संबंधी जांच करवाने पर शिल्पीबेन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस कारण उसे सुरेन्द्रनगर के कोविड-19 अस्पताल में भर्ती किया गया।
पति बना केयर टेकर, संवाद की जटिल समस्या
शिल्पी के साथ उसका पति जयदीप केयर टेकर के तौर पर कोविड-19 अस्पताल में साथ रहा। मूक-बधिर दंपती होने के कारण शिल्पीबेन के स्वास्थ्य के साथ दी जाने वाली दवाई, भोजन आदि बातों के साथ ही उनके साथ संवाद करने की जटिल समस्या स्वास्थ्यकर्मियों व चिकित्सकों के लिए और मूक-बधिर दंपती के लिए भी थी। ऐसी विकट परिस्थिति में चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ संवाद की जटिल समस्या का समाधान स्वयं शिल्पीबेन ने सरल सांकेतिक भाषा में बताया।
शिल्पीबेन के अनुसार उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। वहां पति जयदीप साथ रहे। दंपती की सांकेतिक भाषा वे सभी समझते। उपचार के दौरान शिल्पाबेन को कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई। उन्हें कोरोना पॉजिटिव अन्य रोगियों के साथ रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए गरम पौष्टिक भोजन, आयुर्वेदिक काढ़ा दिया गया।

चुनौती के समान था शिल्पीबेन का उपचार करना

सुरेन्द्रनगर के सिविल सर्जन डॉ. वसेटीयन के अनुसार मूक-बधिर शिल्पीबेन का उपचार करना चुनौती के समान था, क्योंकि वह केवल सांकेतिक भाषा ही समझती थीं। चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों ने इस चुनौती का सामना किया। चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी संकेतों व रंगों की भाषा में शिल्पीबेन से संवाद करते। अस्पताल के काउंसलरों ने मानसिक सहयोग देकर शिल्पीबेन का मनोबल भी मजबूत किया।
लगातार 10 दिनों तक उपचार के बाद शिल्पीबेन को बुखार, सर्दी-खांसी आदि लक्षण नहीं दिखाई देने पर कोविड-19 अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पति जयदीप के साथ अस्पताल से जाते समय शिल्पीबेन ने सजल नेत्रों से सांकेतिक भाषा में कोरोना से डरने या घबराने की जरूरत नहीं लेकिन सावधानी रखते हुए कोरोना से बचने के लिए सेनेटाइजर से हाथ साफ करने, मास्क पहनने, सोशल डिस्टेन्स रखने की अपील की।

Rajesh Bhatnagar
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