कई फसलें उगा रहे वडोदरा जिले के वांकानेर निवासी धर्मेश पटेल

खेत एक फसल अनेक : गाय आधारित खेती में आलू के साथ चने उगाने का सफल प्रयोग

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 26 Dec 2020, 12:32 AM IST

जफर हुसैन

वडोदरा. जिले की सावली तहसील के वांकानेर गांव के किसान धर्मेश पटेल वर्ष 2017 से सुभाष पालेकर की शैली में गाय आधारित खेती का रास्ता अपना रहे हैं। उन्होंने गाय आधारित खेती में आलू के साथ चने की बुवाई कर सफल प्रयोग के रूप से फसल प्राप्त की है।
विटामिन सी से भरपूर पोमेलो फल के पौधे लगाने के बाद वर्ष 2017 में उन्होंने सवा दो बीघा जमीन पर केले के 1600 पौधे रोपे। केवल गाय के गोबर, गोमूत्र और गुड़ सरीखी सामग्री का उपयोग कर ठोस जीवामृत और तरल जीवामृत के मिश्रण का उपयोग कर केले की फसल तैयार की। अब वे ऑफ-सीजन में भी केले की एक और फसल का लाभ ले रहे हैं।
उनके अनुसार गाय आधारित खेती के केले में प्राकृतिक मिठास होती है और एक से अधिक बार केले के उत्पादन से उपज और गुणवत्ता बरकरार रहती है। रासायनिक खाद के केले के उत्पादन से जमीन सख्त बनने के कारण उपज और गुणवत्ता घटती है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एक बार गाय आधारित केले की खेती करने से केले के एक पौधे से सौ वर्ष तक उपज मिल सकती है।
गाय आधारित खेती में एक नए प्रयोग के रूप में उन्होंने केले के पेड़ों के बीच खाली जमीन पर चंवले, पत्ता गोभी, फूल गोभी, बैंगन, मिर्च और देशी टमाटर उगाकर एक खेत फसल अनेक का नया प्रयोग भी किया है। उनका कहना है कि किसान को हमेशा प्रयोगशील रहना चाहिए, जिससे कम भूमि में अधिक से अधिक विविध खेती हो और स्वाभाविक रूप से आय में वृद्धि हो। जब केला एक दीर्घकालिक फसल है, तो सब्जियों की खेती मौसमी आय का एक स्रोत हो सकती है।
मानव स्वास्थ्य और जमीन की तन्दुरस्ती के लिण् गाय आधारित शुद्ध खेती को उत्तम बताते हुए उन्होंने कहा कि इस खेती से जमीन पोची बनती है, उसमें केंचुओं सरीखे ्रउपयोगी जीवों की संख्या बढ़ती है, लागत आनुपातिक रूप से घट जाती है। फलस्वरूप यह भूमि और मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक है। वांकानेर क्षेत्र के उनके मित्र भी इस प्रयोग में शामिल हुए हैं।

Rajesh Bhatnagar
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