गाय के गोबर के दीयों से इस बार जगमग होगी दिवाली

चीन के विरुद्ध भारत के आत्मनिर्भर अभियान की धमक

1 करोड़ 11 लाख दीये तैयार, 5 करोड़ बनाने का है संकल्प

450 महिलाएं रंगीन दीये बनाकर कमा रहीं प्रति माह 10 हजार रुपए

By: Rajesh Bhatnagar

Updated: 29 Oct 2020, 12:16 AM IST

जफर सैयद/राजेश भटनागर.
वडोदरा. चीन को सबक सिखाने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस बार दिवाली में पूरे देश में गाय के गोबर से बने दीये जगमगाएंगे। वडोदरा समेत पूरे देश में गाय के गोबर से बने देसी दीयों के उपयोग का संकल्प लिया गया है।
वडोदरा के छाणी में कामधेनु गो अमृत संस्था की ओर से गाय के गोबर से 1 करोड़ 11 लाख 11 हजार 111 दीये तैयार हो चुके हैं। करीब 450 महिलाएं गाय के गोबर से सादे व रंगीन व डिजाइनर दीये बनाने में लगी हैं। गोबर से दीये बनाने का संकल्प 5 करोड़ से अधिक दीये बनाने तक पहुंच सकता है। चीन के एक दीये की कीमत करीब 10 रुपए है जबकि संस्था की ओर से गाय के गोबर से तैयार दीये की कीमत 3 से 5 रुपए प्रति दीये के हिसाब से निर्धारित की गई है।

मंदिरों व गरीबों को निशुल्क

गोबर से बनाए जा रहे दीयों में से कई मंदिरों, गरीबों व जरूरतमंदों को निशुल्क वितरित करने की योजना है। अन्य स्थानों के लोग आवश्यकता के अनुरूप ऑनलाइन दीये मंगवा सकते हैं। ऑनलाइन दीयों की बिक्री में आईआईटी के छात्र मदद कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म पर देसी दीयों की ब्रांडिंग कर रहे हैं। विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भी ऑनलाइन दीये मंगा रहे हैं।

कमा रही महीने के 8-10 हजार रुपए

संस्था की ओर से महिलाओं को वर्षभर काम उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गोबर के दीये बनाने के काम में जुटी महिलाएं घर बैठे ही महीने के 8 हजार से 10 हजार रुपए तक कमा रही हैं। महिलाओं से रक्षाबंधन पर गोबर की राखियां, गणेशोत्सव में बनाई भगवान गणपति की मूर्तियां भी बनवाकर बेची गई हैं।

संस्था की ओर से वडोदरा के अलावा गुजरात के अलग-अलग शहरों में भी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं को गृह उद्योगलक्षी काम उपलब्ध करवाकर रोजगार दिया जा रहा है।
- मुकेश गुप्ता, निदेशक, कामधेनु गो अमृत संस्था, छाणी, वडोदरा

Rajesh Bhatnagar
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