दान में मिली २७ बीघा जमीन महंत ने दाता को लौटाई

दान में मिली २७ बीघा जमीन महंत ने दाता को लौटाई

Gyan Prakash Sharma | Publish: Sep, 16 2018 11:13:22 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

दानदाता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से महंत की घोषणा

जूनागढ़. संत-महंतों की भूमि गिरनार क्षेत्र दाताओं से प्रसिद्ध है। महंत ने १४ वर्ष पूर्व दान में मिली २७ बीघे जमीन को दानदाता को वापस लौटाकर इस वाकया को सही साबित किया है।
यहां गिरनार की बात हो रही है। गिरनार की तलहटी स्थित रुद्रेश्वर जागीर की जगह के महंत इन्द्रभारती को १४ वर्ष पूर्व २७ बीघे जमीन दान में मिली थी, जिसकी वर्तमान कीमत करीब ७ करोड़ बताई जा रही है।
राजकोट में ऑयल इंजीनियरिंग की के. रसितलाल एंड कु. वाळा जयदेवभाई दवे की सासण गिर के पास देवळिया सफारी पार्क के सामने २७ बीघे जमीन थी। यह जमीन वर्ष २००४ में जयदेव दवे ने महंत इन्द्रभारती को सेवा-पूजा एवं भजन करने के लिए गुरुदक्षिणा के रूप में दे दी थी।
दूसरी ओर, फिलहाल दाता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी और व्यवसाय में हानि होने लगी। इसकी जानकारी महंत को हुई तो उन्होंने दान में मिली २७ बीघे जमीन को वापस दाता को लौटाने की घोषणा की है। दूसरी ओर दाता जयदेवभाई ने फिलहाल इस बात को स्वीकार नहीं किया।

 

अब गिरनार पर्वत पर भी देख सकेंगे शेर, राज्य सरकार ने दी मंजूरी
जूनागढ़. एशियाई शेरों को देखने के लिए अब पर्यटकों को सागण गिर जाना जरुरी नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार ने गिरनार पर्वत पर एशियाई शेरों को देखने की दरखास्त को मंजरी दे दी है। ऐसे में आगामी १५ अक्टूबर से पर्यटक जूनागढ़ से ५-६ किलोमीटर दूर स्थित गिरनार पर्वत पर भी शेरों को देख सकेंगे।
वन विभाग के उप वन संरक्षक के अनुसार वन विभाग की ओर से जूनागढ़ की सीमा में गिरनार पर्वत के १८० किलोमीटर जंगल में तीन स्थलों पर शेरों के देखने की मंजूरी के लिए राज्य सरकार से मांग की थी। वन विभाग की ओर से की गई दरखास्त राज्य सरकार ने मंजूर की है और संभवत: १५ अक्टूबर से गिरनार के जंगल में उत्तर विभाग के इन्द्रेशवर नाके से पातुरण राउंड के ३५-४० किलोमीटर के क्षेत्र में शेर देख सकेंगे। इसके लिए सुबह एवं शाम को ५-५ परमिट ऑनलाइन दिए जाएंगे।
गिरनार पर्वत के जंगल में ३८ शेर रहते हैं। इसप्रकार गिरनार पर्वत का जंगल आगामी दिनों में शेरों के देखने वाला सैकेंड होम बनेगा।
उल्लेखनीय है कि फिलहाल शेरों को देखने के लिए पर्यटकों को जूनागढ़ से ६० किलोमीटर दूर सासण गिर के जंगल में जाना पड़ता है।

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