गुजरात में हो रही मानव तस्करी रोकने को प्रभावी कानून आवश्यक

पुलिस और श्रम विभाग के अंतरराज्यीय समन्वय पर जोर

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 10 Feb 2021, 10:53 PM IST

अहमदाबाद. पड़ोसी राज्यों से गुजरात में हो रही मानव तस्करी रोकने को प्रभावी कानून आवश्यक बताते हुए पुलिस और श्रम विभाग के अंतरराज्यीय समन्वय पर जोर दिया गया है।
मानव तस्करी के संबंध में मीडियाकर्मियों को प्रशिक्षण के लिए भारत सरकार की ओर से गठित संस्था 'प्रयास' एवं गुजरात के लिए अहमदाबाद में कार्यरत ब्रिटिश उप उच्च आयोग की ओर से गुजरात में मानव तस्करी संबंधी मामलों में प्रतिक्रिया बढ़ाने (टू इन्हान्स दि रेस्पांस टू ह्यूमन ट्रैफिकिंग रिलेटेड मैटर्स) को पत्रकारों के लिए बुधवार को आयोजित आनलाइन कार्यशाला में 'प्रयास' की वकील निकिता ओपल ने यह बात कही।
उन्होंने पत्रकारिता के पांच प्रमुख सिद्धांत, मानव तस्करी के मामलों में पत्रकारिता संबंधी स्त्रोतों, पी?ितों और उत्तरजीवी (सर्वाइवर) से व्यवहार, पी?ित/गवाह/अपराधी महिला एवं बच्चों के संबंध में रिपोर्टिंग के दिशानिर्देशों, नैतिक विचार, आचार-विचार : प्रेस कौंसिल आफ इंडिया की ओर से पत्रकारिता संबंधी मानदंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी में पीडि़तों और परिजनों की सहमति आवश्यक नहीं है। बाल श्रम कानून और तस्करी के बीच अंतर करना काफी चुनौतीपूर्ण है। बाल श्रम के मामलों में अंतरराज्यीय तस्करी को रोकने के लिए प्रत्येक राज्य में श्रम विभाग की टास्क फोर्स होनी चाहिए।
चाइल्ड राइट कमीशन संस्था के संस्थापक अध्यक्ष, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के पूर्व उपायुक्त एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के राज्य विभाग की ओर से 'टीआईपी रिपोर्ट हीरो एक्टिंग टू मॉडर्न स्लेवरी' प्राप्त व 'धूल की आंधी में खाकी' पुस्तक के लेखक अमोद के. कांत ने कहा कि वर्ष 2013 में निर्भया मामले के बाद तस्करी को परिभाषित किया गया और देशभर में पिछले वर्ष 2002 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2013 से पहले, वर्ष 1956 से केवल अनैतिक व्यापार (निवारण) कानून था। उन्होंने कहा कि पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने के कारण ही भीख मांगने वाले बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई संभव नहीं होती।
अहमदाबाद के कुछ पत्रकारों ने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान, महाराष्ट्र के ब?ी संख्या में बच्चे गुजरात में भीख मांगते हैं, मानव तस्करी का शिकार होते हैं, बाल श्रम से जु?ते हैं, अनैतिक तरीकों से बच्चे गोद दिए-लिए जाते हैं, यहां तक कि किशोरियां और युवतियां देह व्यापार से भी जुड़ी हैं। गुजरात में बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर पारिवारिक कारोबार में जुड़ हैं। इसके लिए पुलिस और श्रम विभाग के साथ अंतरराज्यीय समन्वय की कमी और श्रम विभाग में स्टाफ की कमी के साथ ही प्रभावी कानून का अभाव कहीं न कहीं उत्तरदायी है।

संवेदनशील मुद्दा है मानव तस्करी

मानव तस्करी आधुनिक बीमारी है। कई लोग अपने कृत्य को तस्करी नहीं मानते बल्कि तस्करी का हिस्सा मानते हैं। मानव तस्करी एक संवेदनशील मुद्दा है, ऐसे में रिपोर्टिंग करना और समाज के प्रति अपनी ड्यूटी निभाना पत्रकारों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके बावजूद पत्रकार अपनी रिपोर्टिंग से समाज में लोगों का व्यवहार बदल सकते हैं।

- पीटर कूक, ब्रिटिश उप उच्च आयुक्त, ब्रिटिश उप उच्च आयोग, अहमदाबाद, गुजरात।

Rajesh Bhatnagar
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