एकलव्य बता रहे नीरज ने 36 डिग्री पर ही क्यों फेंका भाला

उल्टे सीधे ऐसे सवाल जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के दिमाग की बत्ती जला दें, तोप ने 55 डिग्री पर ही क्यों दागा गोला, हर रविवार शाम 4 से 5 बजे तक लगेंगी क्लास, 3030 एकलव्य बताएंगे नए तरीके, देशभर के बच्चों को जोडने के लिए मोबाइल पर भेज रहे मैसेज

By: MOHIT SHARMA

Updated: 08 Oct 2021, 12:28 AM IST

मोहित शर्मा
अहमदाबाद/ दिल्ली. क्लास रूम के बाहर की जिंदगी साइंस और मैथ्स के नियमों से कुछ अलग ही है। ये हम नहीं कह रहे वास्तव में ऐसा ही है। हम आपको बताते हैं आखिर क्या है ऐसा, जिससे यह सब पता चला है। उल्टे सीधे ऐसे सवाल जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के दिमाग की बत्ती जला दें। इन्हीं सवालों को हल करेंगे 3030 एकलव्य।

ये तो आप सब जानते हैं कि नीरज चौपडा ने 36 डिग्री पर अपना भाला फेंक कर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। वहीं 1918 प्रथम विश्व युदृध में दुनिया की सबसे बडी तोप ने 130 किलोमीटर दूर गोला 55 डिग्री पर फेंका। इन दोनों इवेंटस को देखकर ऐसा लगता है कि क्लास रूम के बाहर की जिंदगी साइंस और मैथ्स के नियमों से कुछ अलग ही है। करिकूलम के अनुसार तो प्रोजेक्टाइल को 45 डिग्री पर फेंके तो सबसे ज्यादा दूर जाती है, लेकिन नीरज ने अपना भाला 45 से कम और तोप ने अपना गोला 45 से ज्यादा पर दागा। ये तो बड.ी नाइंसाफी है। करिकूलम और रीयल लाइफ की इसी दूरी को कम करने के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और सेंटर फॉर क्रियेटिव लर्निंग (सीसीएल) आईआईटी गांधीनगर ने देशभर के विद्यार्थियों के लिए एकलव्य सीरिज की शुरुआत की है।

अच्छी बात ये है कि नई शिक्षा नीति 2020 (नीप) और प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट एसेसमेंट (पीसा) दोनों ही इन्हीं बातों पर जोर दे रहे हैं। इसमें 3030 एकलव्य नित नए तरीके बताएंगे, जिससे स्टूडेंटस के डाउट क्लीयर हो सकेंगे।

ये रहा गोला और भाला दूर जाने का कारण
नियमानुसार तो 45 डिग्री (ऑप्टिमम-अनुकूलतम) एंगल माना जाता है जिस एंगल से भाला सबसे ज्यादा दूरी तय कर सकता है। व्यावहारिक तौर पर इसे 35 से 40 डिग्री पर भी यदि फोर्स के साथ फेंका जाए तो यह सर्वाधिक दूरी तय करता है। नीरज ने भागते हुए भाला 36 डिग्री पर फेंका, जो सबसे अधिक दूरी पर गया। इसमें न्यूटन की गति के नियम को भी बताया गया है। इसी तरह तोप से गोला फेंकने में उचाई ने काम किया। जिससे गोला ज्यादा देर हवा में रह सका।

सभी को होगा सीरिज से जुड़ना जरूरी
सीबीएसई के डायरेक्टर एकेडमिक डॉ जोसेफ इमानुअल ने इस संबंध में देश के सभी सीबीएसई से सम्बदृध स्कूलक्स के प्रिंसिपल्स, केन्द्रीय और नवोदय विऋालयों को भी पत्र लिखा है। जिसमें इस सीरिज से जुड़ने के लिए कहा गया है।

ये बता रहे बच्चों को
आम क्लास रूम से एकलव्य क्लासरूम, एक्शन से रिएक्शन का अनोखा सफर। न्यूटन के सिदृधातों की समझ अब मिलेगी एक ही जगह।
एकलव्य सीरिज में बच्चों के लिए हैंड जोन एक्टीवीटीज, मॉडल, प्रोजेक्ट के माध्यम से बताया जा रहा है। जिससे कैन्सेपचुअल वैचारिक अंडरस्टेडिंग बढे। ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे जो बच्चों के दिमाग की बत्ती जला दें। जिससे आउट आॅफ बॉक्स क्रियेटिव थिकिंग डवलप हो। इसमें बच्चे, टीचर्स और प्रेरेन्टस सभी जुड सकेंगे। इससे सभी गणित और विज्ञान अनोखे तरीके से सीख सकेंगे। यह क्लास हर रविवार शाम 4 से 5 बजे तक लगेंगी।
इस सीरिज में कक्षा 6 से 12 के गणित और विज्ञान विषय को शामिल किया गया है। इसके लिए स्टूडेंट को रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें स्टूडेंटस के कॉन्सेप्ट क्लीयर होंगे।
स्टूडेंटस को इससे जोडने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर मैसेज भी भेज जा रहे हैं। हर बार क्लास में अलगअलग तरीके बताए जाएंगे, जिन्हें बच्चे सीख कर स्वयं भी अपना सकेंगे।

MOHIT SHARMA
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