Ahmedabad News : इंजीनियर किसान युवक ने की काले चावल की सफल खेती

खेडा जिले के सांखेज गांव में...

इंजीनियर किसान युवक ने की काले चावल की सफल खेती

गुजरात में पहली बार प्राप्त की सफलता

अब तक त्रिपुरा व मिजोरम में ही होती है ब्लेक राइस की खेती

मधुमेह व पाचन के लिए लाभदायक

आणंद. सामान्यतया खेती के लिए उचित जमीन व मौसम की जरूरत पूरी करने वाले त्रिपुरा व मिजोरम राज्यों में ही अब तक काले चावल (ब्लेक राइस) की खेती की जा रही है लेकिन खेडा जिले के सांखेज गांव के एक इंजीनियर किसान युवक ने गुजरात में सर्वप्रथम बार ब्लेक राइस की खेती करने में सफलता प्राप्त की है। ब्लेक राइस को मधुमेह व पाचन के लिए लाभदायक माना जाता है।
खेडा जिले के सांखेज गांव निवासी इंजीनियर किसान युवक शिवम हरेश पटेल ने अपनी समझदारी व उचित मार्गदर्शन से ब्लेक राइस का उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। शिवम के अनुसार ब्लेक राइस मधुमेह व डाइट आदि के लिए काफी उपयोगी माने जाते हैं। उसने त्रिपुरा से 15 किलो बीज मंगवाकर अपनी 3 बीघा जमीन में बीज का छिड़काव किया। उसने तीन बीघा जमीन से 2800 किलो ब्लेक राइस की उपज प्राप्त की। फिलहाल ब्लेक राइस की बिक्री कम होने के कारण वह ऑनलाइन बिक्री कर अच्छी कमाई कर रहा है।

रूस में मेडिकल की पढ़ाई कर रही बहन ने दी सलाह

शिवम के अनुसार उसकी बहन रूस में मेडिकल में अध्ययनरत है। बहन ने कॉलेज में ब्लेक राइस के बारे में जानकारी हासिल की। उसने भाई को ब्लेक राइस की खेती के लिए जानकारियां दी और त्रिपुरा जाकर अधिक जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी। उसके बाद शिवम ने त्रिपुरा से ब्लेक राइस के बारे में समग्र जानकारी हासिल कर अपने खेत में उत्पादन करने का निर्णय किया।
वजन कम करने व यकृत की सफाई में सर्वाधिक उपयोगी
जानकारी के अनुसार ब्लेक राइस को वजन कम करने और यकृत की सफाई में सर्वाधिक उपयोगी माना जाता है। इसमें अधिक मात्रा में फाइबर होने के कारण कब्जी सरीखी समस्या भी इससे दूर होती है। धूम्रपान की आदत अथवा उच्च रक्तचाप व कोलेस्ट्रोल की शिकायत वाले लोगों को ब्लेक राइस के सेवन से रक्त धमनियों में लाभ होता है।

इंजीनियरिंग के बाद पसंद किया पुश्तैनी व्यवसाय

शिवम ने इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम पूरा करने के बावजूद नौकरी या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के बजाय पुश्तैनी खेती व्यवसाय में जाने को पसंद किया और एक प्रगतिशील किसान के तौर पर खेती कर सफलता प्राप्त की है। शिवम के अनुसार उसे खेती की जमीन विरासत में मिली है और वह नए शोध व पहल के साथ खेती करता है। इस वर्ष उसने त्रिपुरा से ब्लेक राइस के बीज मंगवाकर अपने खेत में बुवाई कर खेती की।

आर्गेनिक खाद से चार महीनों में तैयार होती है फसल

शिवम के अनुसार आर्गेनिक खाद का उपयोग करने पर ब्लेक राइस की फसल चार महीनों में तैयार होती है। प्रति बीघा जमीन पर 10-12 हजार रुपए खर्च होते हैं। यह ब्लेक राइस बाजार में 350 से 600 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकते हैं। उसके अनुसार सामान्य धान की ही भांति ब्लेक राइस की खेती की जाती है, अगर वातावरण अच्छा हो तो अधिक उत्पादन संभव है।
उसके अनुसार ब्लेक राइस की फसल तैयार होने पर उसकी ऊंचाई साढ़े पांच फीट तक होती है और नीचे का तना भी ब्लेक रंग का होता है। इसके दाने भी बासमती राइस के समान होते हैं। ब्लेक राइस के बीज महंगे होने के कारण किसान इसकी खेती नहीं करते। पके हुए आधा कप ब्लेक राइस खाने से 160 कैलोरी, 1.5 ग्राम वसा, 34 ग्राम कार्बोहाइट्रेट, 2 ग्राम फाइबर, 5 ग्राम प्रोटीन, 4 ग्राम लोह तत्व मिलते हैं। शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेन्ट, एन्थोकायनीन के कारण इनका रंग गहरा और स्वाद अखरोट के समान होता है।

Rajesh Bhatnagar
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