Lock down के बीच अपनों से करें विचारों का आदान-प्रदान

भावनाएं जताने से होगा अकेलापन दूर
मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह

By: Omprakash Sharma

Published: 27 Mar 2020, 10:25 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए लॉक डाउन स्थिति का रहना आवश्यक हो गया लेकिन ऐसे हालातों में समय गुजारना कोई बहुत बड़ी चुनौती भी नहीं है। व्यक्ति जब अकेला हो तो मन हल्का करने के लिए वह अपनों से बात करना चाहता है। आज के जमाने में मोबाइल फोन ऐसा माध्यम है कि कोई भी अपनों से बात कर विचार-भावनाओं का आदान प्रदान कर सकता है।
अहमदाबाद शहर में सरकारी मेंटल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अजय चौहाण ने लॉक डाउन की स्थिति को लेकर मानसिक रूप से संतुष्ट रहने की सलाह दी है। वे मानते हैं कि देश दुनिया में कोरोना के चलते जो हालात उत्पन्न हुए हैं उनसे निपटने के लिए संभवत: लॉक डाउन महत्वपूर्ण निर्णय है। इसके लिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि अपनी मानसिक स्थिति को आमदिनों की तरह बनाए रखना है। घरों में रहकर उन कार्यों में मन लगा कर समय गुजारा जा सकता है जो मनपसंद हों। इसके अलावा घरों में रहकर योग-व्यायाम करें जिससे मन को शांति भी मिलती है। अकेले पन को दूर करने के लिए उन्होंने सबसे बेहतर उपाय फोन पर अपनों से बात करना बताया। उनका कहना है कि भावनाओं को एक दूसरे से आदान-प्रदान कर सबसे अधिक सांत्वना मिलती है। घरों में टीवी देखकर या रेडियो सुनने के अलावा गीत, संगीत, रुचिकर पुस्तकें पढ़कर भी समय गुजारा जा सकता है। महामारी को लेकर चिन्ता करने से तनाव होता है बचाव श्रेष्ठ उपाय है।
कुछ लोग डर कर बढ़ा लेते हैं तनाव
मनोचिकित्सक डॉ. चौहाण का कहना है कि कुछ लोग ऐसे हैं जो घर में रहकर विविध चिन्ताओं से ग्रस्त रहते हैं। ऐसे लोगों में तनाव, अवसाद के साथ साथ रक्तचाप भी बढऩे लगता है। इन लोगों के लिए योग, कसरत के अलावा अपनों से समय समय पर बात करने की सलाह दी है।
यह भी दी सलाह
कोरोना वायरस के खतरे के बीच चिकित्सक डॉ. चौहाण ने कहा कि जो लोग इन दिनों कोरोना की शंका पर क्वोरेन्टाइन के तहत हैं, ऑब्जरर्वेशन में या फिर पॉजिटिव हैं, वे संभवत: अधिक तनाव में हैं। उन्हें भी अपनी मानसिक स्थिति को बनाए रखना चाहिए। ऐसे लोग जागरुक रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही गलत तरह से डरें नहीं और डर और सुरक्षा के बीच अन्तर को समझें। इस तरह के लोगों को अपनी सुरक्षा करते हुए ढांढस बंधाना चाहिए। क्योंकि मनसिक रूप से व्यक्ति के टूटने से ही ज्यादा नुकसान होता है।

Omprakash Sharma Reporting
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