माता-पिता को गंवाकर दूसरों के परिवारों को बचाने के लिए मैदान में डंटी अपेक्षा

कोरोना संक्रमण से अन्य लोगों के माता-पिता की जान बचाकर देना चाहती हैं अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 03 May 2021, 12:06 AM IST

रोहित सांगाणी

राजकोट. माता-पिता को खोए कुछ ही समय हुआ लेकिन अपेक्षा मारडिया ने स्वीकार किए गए व्यवसाय के लिए समर्पित होकर वर्तमान स्थिति में अन्य लोगों के माता-पिता की मदद करने को ड्यूटी निभा रही हैं।
राजकोट के पी.डी.यू. मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत अपेक्षा का कहना है कि उनके माता-पिता अब नहीं हैं, इसका बहुत दुख है। यह दुख भूलाकर वह मानवता को महत्व देकर विकट परिस्थिति में अन्य लोगों की मदद करना चाहती हैं।
उनका कहना कि कोरोना संक्रमण से अन्य लोगों के माता-पिता को बचाकर वह अपने माता-पिता को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहती हैं। गंभीर रूप से बीमार रोगियों और उनके परिवारों को चिकित्सा टीम पर भरोसा है, ऐसे में उनकी उम्मीद पर खरा उतरना चाहिए। यही समझकर अपेक्षा ने पिछली 27 अप्रेल को राजकोट के समरस कोविड सेंटर पर ड्यूटी शुरू की है।
मरीजों की रिपोर्ट, ऑक्सीजन स्तर की जांच करने, दवा देने, मरीजों को स्थानांतरित करने व अन्य कार्यों में वह मदद कर रही हैं। अपेक्षा ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि हाल ही सेंटर से एक गंभीर मरीज को पी.डी.यू. मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित करना था। उस मरीज के साथ एंबुलेंस में जाकर देखभाल की और मरीज को वेंटिलेटर पर रखने तक उन्होंने मदद की। फिलहाल उस मरीज की हालत अच्छी है, यह उनके लिए आनंद की बात है।
कोरोना से अपेक्षा के पिता का पिछली 6 अप्रेल को और माता का 10 अप्रेल को निधन हो गया था। 10वीं कक्षा में अध्ययनरत छोटे भाई की जिम्मेदारी भी वही संभाल रही हैं। कोरोना संक्रमण से अन्य लोगों के माता-पिता की जान बचाकर वह अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं।
सेंटर के अध्यक्ष चरणसिंह गोहिल व वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम के अनुसार ऐसे समय में अपेक्षा चाहती तो ड्यूटी करने से इनकार कर सकती थीं। दुखी रहने के बजाए फर्ज को प्राथमिकता देकर अपेक्षा ने अन्य मरीजों की देखभाल करने का निश्चय किया और वह फर्ज निभाने में जुट गईं।
वर्तमान में सेंटर में अनेक मरीजों के बीच काफी विश्वास और हिम्मत का प्रेरणादायी उदाहरण देकर अपेक्षा अपने कार्य में विशेषज्ञ बन रही हैं। गोहिल के अनुसार अपेक्षा की भांति एमबीबीएस के विद्यार्थी आवश्यकता के समय मरीजों को बचाने के लिए अपना फर्ज अदाकर सच्चे अर्थ में कोरोना वॉरियर साबित हो रहे हैं।

Rajesh Bhatnagar
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