Ahmedabad News : खजूर की खेती कर नई राह बना रहे गुजरात के किसान

सेना की नौकरी कर तो कोई सेवानिवृत्त के बाद कमा रहा लाखों रुपए

सेना की नौकरी छोड़कर लौटे अश्विन पटेल कर रहे खजूर की खेती

सेवानिवृत्त मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी भी किसानी में जुटे

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 02 Aug 2020, 10:24 PM IST

राजेन्द्र धारीवाल/राजेश भटनागर
पालनपुर/अहमदाबाद. एक दशक से गुजरात के किसान खजूर की खेती के लिए प्रेरित हुए हैं। कोई सेना की नौकरी छोड़ तो कोई सेवानिवृत्त होकर खेती कर रहा है। ऐसे लोगों से प्रेरित होकर गांव के किसान भी कामर्शियल फार्मिंग कर रहे हैं। भारतीय सेना की नौकरी छोडऩे के बाद बनासकांठा के भीमपुरा गांव के अश्विन चेलाभाई पटेल ने कृषि महोत्सव से प्रेरित होकर वर्ष 2013 में खजूर की खेती का संकल्ल लिया और 15 एकड़ जमीन पर अनार और इजराइली बाराही खजूर के 200 पौधे रोपे। वर्ष 2016 से खजूर लगने लगे। पिछले वर्ष 24 टन खजूर का उत्पादन कर 13 लाख रुपए कमाए। इस वर्ष 30 टन खजूर के उत्पादन की संभावना है।
इसी तरह खीमाणावास गांव के सेवानिवृत्त मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरुण आचार्य ने खजूर की खेती से लाखों रुपए कमा रहे हैं। उनके पिता ने वर्ष 2010-11 में इजराइली बाराही खजूर के 260 पौधे 5 एकड़ जमीन पर रोपे थे। रण क्षेत्र से जुड़े गांव में गोबर की खाद से खजूर की खेती की। खजूर के पेड़ों के बीच बाजरा, ज्वार, जीरे आदि की भी खेती मुनाफा देरही है।

देश विदेश तक जाते हैं खजूर
अश्विन के अनुसार 3000 टीडीएस तक के खारे पानी से मीठी शहद सरीखी खजूर पकाना संभव है। अनार भी पर्याप्त पैदा होता है। उन्होंने कंपनी बनाई और किसानों से अनार खरीदकर दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में भेजना शुरू किया। इनके खजूर और अनार ब्रिटेन, अमरीका सहित कई देशों में निर्यात होते हैं।

गांव के किसान भी लगा रहे खजूर और अनार
प्रेरणा लेकर पास के गांव के वशराम पटेल ने वर्ष 2015 में खजूर के पौधे रोपे। इन्हें राज्य सरकार से मदद भी मिली। इन्होंने खजूर से 8 लाख तो पेड़ों के बीच जीरे की खेती से 4 लाख रुपए कमाए। एक बार खजूर की बुवाई के बाद दो पीढिय़ों तक आवक प्राप्त की जा सकती है। खजूर के एक पेड़ की आयु 100 वर्ष की मानी जाती है।

कईयों को दिया रोजगार
बुढरपुर गांव के प्रगतिशील किसान अणदाराम भेमाभाई पटेल ने चार वर्ष पहले 300 पौधों लगाकर इसकी खेती की। अब वे कुल 12 एकड़ जमीन पर 600 पौधे रोपकर इजराइली बाराही खजूर की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में एक पेड़ से 100 किलो तो अब 200 किलो खजूर होती है। एक पेड़ से करीब 5 हजार रुपए की आय होती है।

गुजरात खजूर में आगे
देश में गुजरात विशेषकर कच्छ व बनासकांठा के रण इलाके में तथा पंजाब व राजस्थान में इसकी खेती होती है। गुजरात में इसके 20 लाख से ज्यादा पेड़ बताए जाते हैं। भारत 35 लाख मीट्रिक टन खजूर का आयात करता है। इसके पेड़ से फल प्राप्त होने में तीन से चार वर्ष का समय लगता है। करीब एक पेड़ 100 से 125 किलो का फल देता है।

सरकार भी दे रही अनुदान
नर्मदा का जल बनासकांठा में अनार और खजूर की खेती के लिए वरदान है। खजूर के एक पौधे के लिए 1250 रुपए अनुदान दिया जा रहा है। बागवानी फसल से किसानों की आवक व सुख-समृद्धि में वृद्धि हो रही है।
- जे.बी. सुथार, उप निदेशक, बागवानी विभाग, बनासकांठा जिला।

Rajesh Bhatnagar Desk
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