पिता घर छोड़ गया, चार महीने पहले मां की मौत से अनाथ हुए चार मासूम

पुलिस टीम ने पहुंचाया बालाश्रम

By: Rajesh Bhatnagar

Updated: 20 Nov 2020, 11:07 PM IST

राजकोट. लावारिस और अनाथ बच्चों का जीवनयापन करना काफी परेशानियों से भरा होता है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए स्वयंसेवी संगठन तो प्रयास करते ही हैं, लेकिन वर्दी का रौब जमाने के लिए मशहूर पुलिसकर्मी भी राजकोट में दरियादिली दिखाते हुए ऐसे मासूमों की मदद के लिए आगे आए हैं।
सूत्रों के अनुसार एक जागृत नागरिक ने चाइल्ड हैल्प लाइन पर फोन कर सूचित किया कि राजकोट के मवड़ी चौकड़ी ओवरब्रिज के नीचे एक होटल के सामने करीब एक सप्ताह से चार मासूम बच्चे अकेले रह रहे हैं। चाइल्ड हैल्प लाइन के प्रतिनिधि नीरद भट्ट ने शहर के मालवीयानगर थाने पर पहुंचकर इस बारे में जानकारी दी।
थाने के निरीक्षक के.एन. भुकण के निर्देशन में सर्वेलन्स स्क्वॉड के उप निरीक्षक वी.के. झाला व टीम के साथ थाने के बाल कल्याण अधिकारी (चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर) सहायक उप निरीक्षक काजलबेन माढक को मौके पर भेजा गया। बाल सहज बुद्धि से पूछताछ करने पर मासूम बच्चों ने अपनी पहचान तेजल रामुभाई वाणिया-देवीपूजक (8 वर्ष), अजय रामुभाई (5 वर्ष), पायल रामुभाई (3 वर्ष) व विजय रामुभाई (डेढ़ वर्ष) के तौर पर बताई।
थाने पर लाकर चारों भाई-बहन को खिलाकर खिलौने देकर काजलबेन ने बाल सहज बुद्धि से पूछताछ की। जवाब में बच्चों ने जानकारी दी कि वे अपनी मां के साथ पूर्व में भगवतीपरा पुल के नीचे रहते थे। पिता लंबे समय से घर नहीं आते और मां ही उनका भरण-पोषण करती थी, लेकिन मां ऊषा की चार महीने पहले मौत हो गई।

बातें सुनकर पुलिसकर्मियों की आंखों से अश्रु बह निकले

उसके बाद वे चारों कुछ समय जामनगर रोड पर भिक्षावृत्ति कर निराधार जीवन जीने लगे। किसी व्यक्ति ने रिक्शे के जरिए मवड़ी चौकड़ी पर ओवरब्रिज के नीचे छोड़ दिया, वहां करीब 8 दिन से रहते थे। यह बातें सुनकर पुलिसकर्मियों की आंखों से अश्रु बह निकले। इस संबंध में शहर पुलिस आयुक्त मनोज अग्रवाल, संयुक्त आयुक्त खुरशीद अहमद, जोन 2 के उपायुक्त मनोहरसिंह जाड़ेजा, दक्षिण विभाग के सहायक आयुक्त जे.एम. गेडम को सूचित किया गया।
भिक्षावृत्ति करने व निराधार जीवन यापन करने वाले बच्चों के उत्थान के लिए स्थायी तौर पर कार्य करने के बारे में शहर पुलिस आयुक्त मनोज अग्रवाल के निर्देश पर थाने के निरीक्षक भुकण के निर्देशन में डी स्टॉफ के उप निरीक्षक झाला व टीम के अलावा थाने के स्टॉफ की ओर से मासूम बच्चों को थाने में निहलाकर स्वच्छ कपड़े पहनाए गए, खिलौने देकर भरपेट भोजन करवाया गया।
इसके बाद मासूम बच्चों के स्वास्थ्य व भविष्य की चिंता कर बालाश्रम में संपर्क कर चारों बच्चों के लिए रहने व भोजन की व्यवस्था करवाकर बालाश्रम में पहुंचाया गया। थाने के अधिकारी व कर्मचारियों ने बालाश्रम का समय-समय पर दौरा करने का आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही चारों बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक सभी प्रयत्न करने का दृढ़ निश्चय भी किया गया।

Rajesh Bhatnagar
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